गोरखपुर जिले के ग्राम पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालयों के रख-रखाव के लिए स्वयं सहायता समूहों के खातों के बजाय सीधे रख-रखाव करने वाली महिला या फिर पूर्व प्रधानों के खातों में धनराशि भेज दी गई। इस तरह की गलती जिले की कई ग्राम पंचायतों में हुई है। सर्वाधिक मामले खजनी विकास खंड से सामने आए हैं। फिलहाल डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने भुगतान निरस्त करने के साथ ही धनराशि भेजने वाले कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है।
जानकारी के मुताबिक जिले में 1244 सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। उनके रख-रखाव एवं संचालन का जिम्मा स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दिया गया है। शासन की ओर से समूहों के खाते में रख-रखाव के लिए जारी धनराशि भेजने का निर्देश दिया गया है।
समूह के खाते में धनराशि जाने के बाद से समूह द्वारा ही संचालन करने वाली महिला को मानदेय दिया जाता है। पर, सहजनवां, खजनी एवं कुछ अन्य ब्लाकों में पूर्व महिला प्रधान या महिला मेठ के खाते में धनराशि भेज दी गई। यह गलती उन गांवों में हुई है, जहां स्वयं सहायता समूह के खाते आसानी से उपलब्ध नहीं हो सके। जल्दी धनराशि भेजने के चक्कर में सीधे महिला के खाते में पैसा भेज दिया गया। जिनके खाते में पैसा गया है, वे वापस भी कर रही हैं। डीपीआरओ ने जिले के सभी ब्लाकों में ऐसी गलती का पता लगाने का निर्देश दिया है।