फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गोरखपुर विश्वविद्यालय: नौ करोड़ की बकाएदारी की जांच करेगी तीन सदस्यीय कमेटी, 15 दिन में मांगी गई रिपोर्ट

Wed, 24 Nov 2021 08:24 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

सहायक निबंधक सहकारिता ने कमेटी ने गठित कर 15 दिन में मांगी रिपोर्ट, 344 शिक्षक, कर्मचारियों पर है बकाया, कई बार भेजा गया है नोटिस।
विज्ञापन
DDU Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 344 शिक्षक व कर्मचारियों पर बकाया करीब नौ करोड़ रुपये के मामले में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी सभी पक्षों से वार्ता कर साक्ष्यों के साथ 15 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

विज्ञापन


नवंबर पहले सप्ताह में ही जिला सहकारी बैंक की ओर से गोरखपुर विश्वविद्यालय वेतन भोगी समिति को नोटिस दिया गया था। समिति के सचिव ने इस मामले में जांच कराने का अनुरोध किया था। जिसके बाद एक तीन सदस्यीय कमेटी बनी थी जिसमें दो सदस्यों को तबादला हो गया।

इसके चलते जांच पूरी नहीं हो सकी। अब जांच के लिए अब नई कमेटी बनाई गई है। कमेटी में अपर जिला सहकारी अधिकारी अमिय कुमार शशि, एलबी मल्ल तथा जिला सहकारी बैंक के उप महाप्रबंधक वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव को रखा गया है।
विज्ञापन




 

विज्ञापन

यह है पूरा मामला

गोरखपुर विश्वविद्यालय वेतन भोगी समिति के माध्यम से वर्ष 2012 में 4.75 करोड़ का लोन 344 शिक्षक, कर्मचारियों को दिया गया। बकाएदारों में एक कुलपति और सात विभागाध्यक्ष भी हैं। बैंक का कहना है कि 4 करोड़ 75 लाख मूलधन व 2.69 करोड़ ब्याज था। कुल राशि अब बढ़कर करीब नौ करोड़ रुपये हो गई है।

सहकारी बैंक समिति का खाता गोलघर स्थित सहकारी बैंक में है। जो अब मुख्य शाखा में आ गया है। बैंक का आरोप है कि सदस्यों ने समिति के मार्फत लोन लिया था। लेकिन रकम नहीं चुकाई। इनमें विश्वविद्यालय के 344 शिक्षक और कर्मचारी शामिल हैं। इतना ही नहीं कुछ शिक्षक और कर्मचारी तो सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। साथ ही कुछ का निधन भी हो चुका है।

लोन जमा किया है तो साक्ष्य दें
बैंक की ओर से बकाए ऋण की वसूली के लिए प्रयास किया जा रहा है। गोरखपुर विश्वविद्यालय वेतन भोगी समिति के सचिव को नवंबर पहले सप्ताह में नोटिस भेजा गया था। समिति ने वर्ष 2015-16 तक की बैलेंस शीट जमा की है। बैंक का कहना है कि अगर शिक्षक व कर्मचारियों ने ऋण चुकाया है तो खाते से कटौती की स्लिप या जमा करने की रसीद उपलब्ध कराएं।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें