सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय, आईएमए उपाध्यक्ष डॉ अमित, आईएमए अध्यक्ष डॉ शिवशंकर
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सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि नई व्यवस्था एक जनवरी, 2022 से पूरी तरह से लागू हो जाएगी। जो नर्सिंग होम पुराने नियमों से पंजीकृत हैं, वह 31 मार्च 2022 तक ही मान्य होंगे। वहीं कम बेड वाले नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटर का निरीक्षण करने के बाद रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी जाएगी।
आईएमए अध्यक्ष डॉ शिवशंकर ने बताया कि सरकार का यह नियम ठीक नहीं है। नर्सिंग होम से लेकर निजी अस्पतालों को हर साल रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है। इस एक्ट के लागू होने के बाद एकल क्लीनिक बंद हो जाएंगे। इस नियम से 80 प्रतिशत अस्पताल बंद हो जाएंगे। इससे मरीजों का ज्यादा नुकसान होगा। छोटे और मंझले हॉस्पिटल को राहत दें।
आईएमए उपाध्यक्ष डॉ अमित मिश्रा ने बताया कि इस एक्ट के लागू होने के बाद छोटे नर्सिंग होमों को परेशानी होगी। अगर छोटे नर्सिंग होम उन मानकों को पूरा करेंगे तो उनका व्यवभार बढ़ेगा। इसका भार मरीजों पर पड़ेगा। इलाज कराने वाले मरीजों को अधिक रुपये खर्च करने पड़ेंगे। इस एक्ट से छोटे नर्सिंग होमों को मुक्त रखना चाहिए। बड़े कॉरपोरेट हॉस्पिटलों पर इसे लागू करें।
नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ खालिद अब्बासी ने बताया कि शहर के नर्सिंग होम क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट का पालन करते हैं। सभी नर्सिंग होमों को इसकी जानकारी पूर्व में दी जा चुकी है। ऐसे में इस एक्ट से डरने की जरूरत नहीं है। इस एक्ट के लागू होने के बाद नर्सिंग होम में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
जिले में नर्सिंग होम की स्थिति
- 30 बेड वाले नर्सिंग होम 75-80 के बीच
- 50 बेड वाले नर्सिंग होम 40-45 के बीच
- 100 बेड वाले नर्सिंग होम 15-20 के बीच
- 200 बेड वाले नर्सिंग होम पांच
- 300 बेड वाले नर्सिंग होम एक