थुरंडा गांव निवासी फिरोज अहमद ने बताया कि ताज होटल की घटना में उसके भाई अखलाक अहमद की मौत हो गई थी। चार भाइयों में अखलाक सबसे बड़े थे। बड़े भाई दोस्तों के बुलाने पर मुंबई गए थे, लेकिन आतंकवादियों के हमले में उनकी मौत हो गई।
भाई की पत्नी सहनाज खातून और 15 वर्षीय बेटी नहिद फातिमा और 14 वर्षीय बेटा मोहम्मद हमजा है। बेटी 11वीं और बेटा नौवीं में पढ़ता है। भाई की पत्नी 25 नवंबर को ही रिश्तेदारों के बुलाने पर मुंबई गई है। उनका भी दर्द है कि आश्वासन तो बहुत मिला, लेकिन कोई मदद नहीं मिल पाई। ऐसा ही हाल अन्य पीड़ित परिवारों का भी है।
पूर्व मंत्री लालमणि प्रसाद बताते हैं कि 26/11 नवंबर की घटना याद आते ही कलेजा कांप उठता है। उस घटना में जिले के चार युवकों की मौत हो गई थी। इन पीड़ित परिवारों की मदद का दायित्व सरकार पर है। देश की हिफाजत के दौरान शहीद हुए सैनिकों के परिवारों की भी मदद सरकार को करनी चाहिए। शहीदों की शहादत को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। ताज होटल की घटना में पकड़े गए आतंकवादी कसाब को फांसी दी गई थी तो समूचा देश खुशी से झूम उठा था। पीड़ित परिवारों को भी खुशी मिली थी।