उधर, ताल की जमीन रजिस्ट्री होने और फिर बिना जांच पड़ताल के खारिज दाखिल भी हो जाने पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने 2004 से लेकर 2012-13 के दौरान तहसील में तैनात एसडीएम, तहसीलदार की भी भूमिका संदिग्ध बताते हुए उनके खिलाफ भी कार्रवाई के लिए संस्तुति की है।
इसी तरह नगर निगम द्वारा नजूल की भूमि और ताल की देखरेख की अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाने और अवैध निर्माण करने वालों के लिए सड़क नाली बनाने वाले नगर निगम के तत्कालीन अफसरों, कर्मचारियों पर भी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने कार्रवाई के लिए लिखा है।
बता दें 2006 की एक जांच रिपोर्ट में तत्कालीन डीएम डॉ हरिओम ने भी नगर निगम की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए लिखा था कि नगर पालिका क्षेत्र में नजूल और ताल होने की वजह से इसकी देखरेख की जिम्मेदारी नगर निगम की थी, जिसे उसने पूरा नहीं किया।
यहीं नहीं उन्होंने रिपोर्ट में पूछा था कि निगम ने किस आधार पर यह कहा कि नजूल और ताल से उसका कोई वास्ता नहीं है। संबंधित आरोपियों का भी पक्ष जानने के लिए अमर उजाला ने इनसे संपर्क करने की कोशिश की, मगर संपर्क नहीं हो सका। इनका जब भी पक्ष आएगा तो उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की जांच में ताल की जमीन रजिस्ट्री और खारिज-दाखिल हो जाने के लिए तत्कालीन एसडीएम-तहसीलदार के अलावा सदर तहसील के 13 लेखपाल और कानूनगो भी जिम्मेदार पाए गए हैं।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के मुताबिक इनमें राजस्व निरीक्षक हरीराम पांडेय, विभूती प्रसाद, दयाराम, खूबलाल, विश्वनाथ प्रसाद, विजय कुमार सिन्हा, लेखपाल दिग्विजय नाथ मिश्रा, ज्ञानचन्द श्रीवास्तव, गुलाबचन्द श्रीवास्तव, ब्रह्मदेव पांडेय, तूफानी प्रसाद, मिथिलेश पांडेय और चंद्रभूषण सिंह का नाम शामिल है।
मानचित्र स्वीकृत करने वालों पर भी होगी कार्रवाई
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने ताल की जमीन पर अवैध निर्माण कराने वालों का मानचित्र स्वीकृत करने वाले जीडीए के तत्कालीन अधिकारियों, जेई पर भी कार्रवाई के लिए कमिश्नर से संस्तुति की है।
उनका कहना है कि 2006 में तत्कालीन डीएम डॉ हरिओम ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जीडीए अब यह सुनिश्चित करे कि वहां किसी भी निर्माण के लिए मानचित्र न स्वीकृत हो, बावजूद इसके जीडीए ने 2010 में यशवंत सिंह के मकान का बिना स्थलीय निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच पड़ताल किए मानचित्र स्वीकृत कर दिया।
शनिवार को भी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में सदर तहसील की टीम ने धर्मशाला की तरफ से सटे हुए ताल सुमेर सागर की जमीन पर बनी करीब 10 दुकान और गोदाम तोड़े। इसके अलावा एक एकड़ में बने विवाह घर को भी आज जमींदोज कर दिया। उधर दूसरी तरफ कांग्रेस नेता राणा राहुल अपने समर्थकों और कुछ पीड़ितों के साथ धरने पर बैठे रहे।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि ताल सुमेर सागर को पाटकर प्लाटिंग करने के बाद जमीन बेचने वाले सात लोगों को चिह्नित कर लिया गया है। सभी के खिलाफ गैंगेस्टर और एंटी भू-माफिया के तहत नगर निगम से मुकदमा दर्ज करवाने के लिए कमिश्नर से संस्तुति कर दी गई है।
तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार और 13 लेखपाल-कानूनगों पर भी कार्रवाई होगी। वहीं नगर निगम और जीडीए के जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई के लिए कमिश्नर से संस्तुति की गई है। ताल का वजूद मिटाने वाले किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।