गांव में खुद को बताया था व्यापारी, पत्नी को नायब तहसीलदार
अंडिला में जालसाज राजीव तिवारी ने खुद को बड़ा व्यापारी और पत्नी शिप्रा तिवारी को नायब तहसीलदार बता रखा था। एम्स थाने की पुलिस ने दोनों पार्किंग और कैंटीन का ठेका दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी के मामले में गिरफ्तार किया। इसके बाद गांव के लोगों को दंपती के करतूत की जानकारी मिली।
इसे भी पढ़ें: पेप्सिको समेत 18 बड़ी कंपनियों के साथ निवेश पर खुद सीएम योगी करेंगे मंथन
सच्चाई सामने आने पर गांव के सभी लोग दंग रह गए। मईल के अंडिला गांव निवासी राजीव तिवारी और इसकी पत्नी शिप्रा तिवारी गांव पर साल में एक से दो बार आते थे। गांव आने पर दावत और लोगों के बीच मोटी रकम भी खर्च करते थे। गांव वालों को राजीव अपनी पत्नी को नायब तहसीलदार और खुद को व्यवसायी बता रखा था।
एक साल से वह गांव में आलीशान मकान का निर्माण करा रहा था। सोमवार की रात जब गोरखपुर की एसओजी टीम छापेमारी कर घर से दंपती को गिरफ्तार कर लिया। तब गांव वालों को पता चला कि राजीव व्यापारी और उसकी पत्नी शिप्रा नायब तहसीलदार नहीं है। बल्कि दोनों ठग है।
इसे भी पढ़ें: छत्ते को छेड़ना पड़ा भारी: गोरखपुर में बिजली दफ्तर पर मधुमक्खियों का हमला, डंक मारने से एक युवक बेहोश
कैंट थाने में दर्ज किया गया था गैंगस्टर का केस
आरोपियों के फरारी के समय ही पुलिस ने जालसाजों पर गैंगस्टर दर्ज करने का अभियान चलाया तो एक बार फिर से दंपती का नाम सामने आ गया। कैंट पुलिस ने आरोपियों पर गैंगस्टर का केस दर्ज किया, लेकिन इसके पहले ही वह जमानत पर रिहा हो चुके थे। पुलिस उनकी तलाश में लगी थी और गिरफ्तार कर मंगलवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेजा गया है।
स्थानीय पुलिस खंगाल रही कुंडली
मईल पुलिस ने गांव में जाकर लोगों से पूछताछ की। अगर किसी से ठगी की गई हो तो रिपोर्ट दर्ज कराए। पुलिस अन्य गांवों में पता लगा रही है कि एम्स में नौकरी दिलाने या अन्य किसी मामले में ठगी तो नहीं किए हैं। हल्का के सिपाहियों को भी बरहज सीओ ने अपने क्षेत्रों में ऐसी जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है।
इसे भी पढ़ें: प्लेटफार्म से पहले रुकी सत्याग्रह, ट्रैक पर दौड़ी भीड़ को आरपीएफ ने रोका