पुलिस ने रंगदारी मांगने, धमकी देने व साहूकारी एक्ट का केस दर्ज तो किया, लेकिन कार्रवाई आज तक पूरी नहीं हो सकी। अब रोहित के गिरफ्तारी के बाद पूरा मामला फिर सामने आ गया है। खबर है कि पुलिस ने इस मामले में नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।
कुछ यही हाल सहजनवां के टड़वा खुर्द के आलोक मिश्रा का भी है। एक शख्स से 60 हजार रुपये कर्ज लेने के बाद उसे चुकाने के चक्कर में वह 24 लोगों से उधार लेकर 1.40 करोड़ रुपये अदा कर चुके हैं। लेकिन अब भी कर्जदार बने हुए हैं। दो महीने पहले आलोक ने परेशान होकर आईजीआरएस पर 24 सूदखोरों का नाम और मोबाइल फोन लिखते हुए कर्जदारों से मुक्ति पाने की गुहार लगाई।
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बताया कि बहन की शादी के लिए कर्ज लिया था। आज इतनी रकम चुका दिया जितनी जिंदगी में कमा भी नहीं सकता है। वह बताते हैं, कर्ज देने वाले ही दूसरे से उधर दिलाते हैं। ऐसे करते-करते 1.40 करोड़ रुपये कर्ज अदा कर चुका। फिर भी कर्जदार बना हुआ हूं।
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वर्तमान में एक भी लाइसेंसी नहीं, ये है नियम
उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम 1976 के मुताबिक, साहूकारी के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। इसके तहत साहूकार प्रतिभूत ऋण यानी कोई वस्तु गिरवी रखकर लिए गए रुपये पर 12 से 14 प्रतिशत वार्षिक ब्याज वसूल सकते हैं। लेकिन, वर्तमान में जिले में एक भी लाइसेंसी नहीं हैं।