प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष प्रोफेसर डीपी सिंह ने वेदांत, भारतीय दर्शन, वेद, शास्त्रार्थ (हिंदू मूल्यों पर बहस), ज्ञान मीमांसा (ज्ञान की परीक्षा), रामायण, महाभारत, हिंदू कला और भाषा जैसे विषयों को शामिल करने वाले पाठ्यक्रम को मौखिक स्वीकृति दी है। प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा, कई धर्मों का तुलनात्मक अध्ययन और पश्चिमी और भारतीय दर्शन का तुलनात्मक अध्ययन भी इसका हिस्सा है।
एक नया विभाग स्थापित किया जाएगा
प्रोफेसर त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय में दर्शन शास्त्र, जैन धर्म, बौद्ध धर्म, पश्चिमी दर्शन और अन्य विषयों के प्रोफेसर हैं जो एमए हिंदू अध्ययन पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं, शुरुआत में ये ही प्रोफेसर छात्रों को पढ़ाएंगे। इसके अलावा, इस पाठ्यक्रम के लिए एक नया विभाग स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हालांकि इसमें थोड़ा समय लगेगा। पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए पात्रता स्नातक होगी।
हाल ही में हुआ था वेबिनार
वहीं, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (एसएसयू) के जनसंपर्क अधिकारी शशिंद्र मिश्रा ने कहा, दो वर्षीय एमए हिंदू अध्ययन पाठ्यक्रम को लागू करने के लिए हाल ही में यूजीसी अध्यक्ष प्रोफेसर डीपी सिंह की अध्यक्षता और आरएसएस के दिग्गज डॉ कृष्ण गोपाल, स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती और उपाध्यक्ष के संरक्षण में एक वेबिनार का आयोजन किया गया था।
इसमें देश के सभी संस्कृत विश्वविद्यालयों सहित दो दर्जन विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति और कुलपतियों ने भाग लिया था। इस दौरान, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति (वीसी) प्रोफेसर वीके शुक्ला ने पूरे पाठ्यक्रम के संबंध में एक प्रस्तुति दी थी। वेबिनार में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय (एसएसयू) के वीसी प्रोफेसर त्रिपाठी भी शामिल हुए।