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QS Ranking: जानें छात्रों के लिए देश और दुनिया में कौन से शहर हैं सबसे अच्छे

Wed, 31 Jul 2019 05:25 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : अमर उजाला
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क्या आप जानते हैं कि देश और दुनिया में स्टूडेंट्स के लिए सबसे अच्छा शहर कौन सा है? अगर नहीं, तो हम आपको इस सवाल का जवाब दे रहे हैं। दरअसल, ग्लोबल कंसल्टेंसी फर्म क्वाक्वैरेली साइमंड्स (QS) ने बुधवार को विद्यार्थियों के लिए सबसे बेहतर शहरों की सूची (क्यूएस बेस्ट स्टूडेंट सिटीज रैंकिंग) जारी की है। इसके अनुसार स्टूडेंट्स के लिए दुनिया में सबसे अच्छा शहर लंदन है। पिछले साल भी लंदन इस सूची में शीर्ष स्थान पर ही था। इस बार भी यह शहर अपनी जगह पर कायम है। वहीं, भारत के चार शहरों को दुनिया के टॉप 120 स्टूडेंट्स फ्रेंडली शहरों की सूची में जगह मिली है। ये शहर हैं दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरू और चेन्नई।

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अगर देश की बात करें तो यहां स्टूडेंट्स के लिए सबसे अच्छा शहर बेंगलुरू बना है। वैश्विक स्तर पर इसे इस सूची में 81वां स्थान मिला है। जबकि दिल्ली 113वें, मुंबई 85वें और चेन्नई 115वें स्थान पर है।

ये हैं स्टूडेंट्स के लिए दुनिया के टॉप 10 शहर

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  1. लंदन (यूके)
  2. टोक्यो (जापान)
  3. मेलबर्न (ऑस्ट्रेलिया)
  4. म्यूनिख (जर्मनी)
  5. बर्लिन (जर्मनी)
  6. मॉन्ट्रीयल (कनाडा)
  7. पेरिस (फ्रांस)
  8. ज्यूरिख (स्विट्जरलैंड)
  9. सिडनी (ऑस्ट्रेलिया)
  10. सिओल (द. कोरिया)
क्यूएस के टॉप-120 शहरों में अमेरिका और यूके के 14-14 शहर और औस्ट्रेलिया के 7 शहर शामिल हैं। एशिया से जापान का टोक्यो और दक्षिण कोरिया का सियोल टॉप 10 में है। हॉन्गकॉन्ग 14वें, चीन का बीजिंग 32वें और शंघाई 33वें स्थान पर है।

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कैसे तय हुई रैंकिंग
यह क्यूएस रैंकिंग किसी शहर में विश्वविद्यालयों की संख्या, उनके शैक्षणिक प्रदर्शन, वहां रोजगार के अवसर, शहर में जीवन की गुणवत्ता और अनुकूलता के आधार पर निर्धारित की जाती है। क्यूएस ने इस सूची को तैयार करने के लिए दुनिया भर से करीब 87 हजार छात्र-छात्राओं से बात की और उनकी प्रतिक्रिया जानी।

क्यूएस के रिसर्च डायरेक्टर बेन सोटर ने कहा, 'हमारी रैंकिंग उन शहरों को दर्शाती है जो छात्रों के पसंदीदा हैं। खासकर अंतरराष्ट्रीय छात्रों के। भारत की प्राथमिकता फिलहाल उसके घरेलू विकास और उच्च शिक्षा तक छात्रों की पहुंच बढ़ाना है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए हमारे कुछ मानकों में भारत को नुकसान हुआ।'

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