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क्या है पाकिस्तान के कब्जे वाला गिलगित-बाल्टिस्तान, जिसने पीएम मोदी से मांगी मदद

Fri, 20 Sep 2019 03:02 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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गिलगित-बाल्टिस्तान असेंबली - फोटो : Social Media
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बीते कुछ दिनों में हमारे देश के मंत्रियों ने कश्मीर को लेकर कई बातें कही हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि 'जब भी मैं जम्मू-कश्मीर का जिक्र करता हूं, तो इसका मतलब पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन (Aksai Chin) भी शामिल होता है।' रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 'अब अगर पाकिस्तान के साथ कोई बात होती है, तो वह पीओके पर होगी, जम्मू-कश्मीर पर नहीं।' इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि 'हम उम्मीद करते हैं कि एक दिन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) पर भी हमारा अधिकार होगा।' 

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वहीं कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पाकिस्तान के शासन वाले गिलगित-बाल्टिस्तान के लिए मदद की मांग की थी। उनका कहना था कि पीएम मोदी संयुक्त राष्ट्र में गिलगित-बाल्टिस्तान में होने वाले मानवाधिकार उल्लंघन का मामला उठाएं।

क्या आप जानते हैं कि ये गिलगित-बाल्टिस्तान है क्या? पाकिस्तान ने कैसे इस क्षेत्र पर कब्जा किया था? अब क्यों इसे भारत से मदद मांगने की जरूरत पड़ गई? आगे पढ़ें, इन सवालों के जवाब।

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क्या है गिलगित-बाल्टिस्तान?

  • गिलगित-बाल्टिस्तान पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के उत्तर में स्थित पहाड़ी क्षेत्र है।
  • इसकी पूर्वी सीमा पाकिस्तानी राज्य खैबर पख्तूनख्वा से लगी है।
  • बात 1846 की है जब एक युद्ध में सिख आर्मी की पराजय के बाद अंग्रेजों ने इसे जम्मू-कश्मीर के अन्य हिस्सों के साथ जम्मू के डोगरा शासक गुलाब सिंह को बेच दिया था। लेकिन एक लीज के तहत अंग्रेजों ने इस क्षेत्र पर अपना अधिकार भी बरकरार रखा था।
  • यह लीज आखिरी बार 1935 में रिन्यू किया गया था।
  • फिर 1947 में कर्नल रैंक के एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी ने जम्मू-कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह के गवर्नर (गिलगित-बाल्टिस्तान) को जेल में डाल दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने अंग्रेजों की मदद से गिलगित-बाल्टिस्तान पर कब्जा कर लिया था।

कैसा है गिलगित-बाल्टिस्तान?

  • आज गिलगित-बाल्टिस्तान करीब 72,871 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है। खूबसूरत वादियों से घिरा है।
  • यह पूरा क्षेत्र पीओके के क्षेत्रफल से करीब साढ़े पांच गुना बड़ा है।
  • हालांकि यहां की जनसंख्या काफी कम है। इस बड़े क्षेत्र में 20 लाख के करीब आबादी रह रही है।
  • गिलगित-बाल्टिस्तान को तीन एडमिनिस्ट्रेटिव डिवीजन और 10 जिलों में बांटा गया है।
  • यहां की साक्षरता दर 72 फीसदी है। यह मुस्लिम आबादी वाला क्षेत्र है।
  • वैसे लोग यहां कई भाषाएं बोलते हैं, लेकिन आधिकारिक भाषा उर्दू है। धार्मिक कार्यों में अरेबिक, जबकि शिक्षा के लिए अंग्रेजी भाषाओं का भी प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा यहां शिना, बाल्टी, बुरूशास्की, खोवर, वाखी भाषाएं भी बोली जाती हैं।
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हालांकि पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान, दोनों पर सीधे पाकिस्तान के इस्लामाबाद द्वारा शासन किया जा रहा है। लेकिन आधिकारिक रूप से ये दोनों ही क्षेत्र पाकिस्तान की सीमा के अधीन नहीं हैं।

पाकिस्तान ने क्यों पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान को अपने नक्शे का हिस्सा नहीं बनाया?

पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान, दोनों ही 'स्वायत्त प्रदेश' (ऑटोनोमस टेरीटरी) हैं। पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से इसे अपने नक्शे में शामिल नहीं किया है। इसका बड़ा कारण ये है कि ऐसा करने से संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक स्तर पर उसे नुकसान होगा।

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वहीं, अगर भारत की बात की जाए तो 1994 में संसद द्वारा पास किए गए एक रिजॉल्यूशन में पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान को जम्मू-कश्मीर राज्य का हिस्सा बताया गया है। जम्मू-कश्मीर, जो 1947 के एक्सेशन के अनुसार भारत का अभिन्न अंग है।

गौरतलब है कि अब गिलगित-बाल्टिस्तान के निवासियों के साथ पाकिस्तान द्वारा किए जा रहे अत्याचारों, उनके मानवाधिकार उल्लंघनों के कारण उन्हें भारत से मदद मांगनी पड़ रही है। 

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