पहले दिन कॉलेजों में पहले, दूसरे व तीसरे वर्ष केछात्रों को मिलाकर उपस्थिति 40 से 70 फीसदी के आसपास रही। कुछ कॉलेजों में पहले वर्ष के छात्रों के लिए कक्षाएं हाईब्रिड रूप में हुई। कैंपस में रौनक से ई-रिक्शा, फूड कोर्ट व रेडी पटरी वालों के चेहरे पर भी मुस्कान लौटी।
कोरोना महामारी के कारण दो साल से बंद दिल्ली विश्वविद्यालय केकॉलेज बृहस्पतिवार को खुल गए। ऑफलाइन कक्षाओं के शुरू होने से छात्रों ने कॉलेजों में वापसी की। छात्रों की दो साल की दूरी दोस्तों से गले मिलकर दूर हो गई। कैंपस में छात्रों ने एक दूसरे से गले मिलकर अपने कॉलेज आने की खुशी का इजहार किया। छात्रों की चहल-पहल से वीरान पड़ा कैंपस एक बार फिर से गुलजार हो गया।
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पहले दिन कॉलेजों में पहले, दूसरे व तीसरे वर्ष केछात्रों को मिलाकर उपस्थिति 40 से 70 फीसदी के आसपास रही। कुछ कॉलेजों में पहले वर्ष के छात्रों के लिए कक्षाएं हाईब्रिड रूप में हुई। कैंपस में रौनक से ई-रिक्शा, फूड कोर्ट व रेडी पटरी वालों के चेहरे पर भी मुस्कान लौटी। पहले दिन विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन केबाहर भी लंबी कतारें देखने को मिली। कई छात्र मेट्रो स्टेशन पर अपने दोस्तों के आने का इंतजार कर रहे थे जिससे कि वह एक साथ कॉलेज जा सके।
कॉलेजों ने भी छात्रों के स्वागत के लिए तैयारी की थी, कहीं मेन गेट व कॉलेज परिसर को गुब्बारों से सजाया गया था तो कहीं फूलों से वेलकम लिखा गया था। पहले वर्ष के छात्रों के लिए तो कॉलेज का यह पहला दिन था। वह फ्रैशर के रूप में कॉलेज पहुंचे थे। जबकि ऐसे भी कई छात्र थे जो कि दो साल बाद अपने कॉलेज पहुंचे थे। पहले वर्ष केछात्रों में काफी उत्साह था। कॉलेजों में पहले दिन ही छात्रों के लिए कक्षाएं भी लगीं। कक्षाओं के बाद छात्र कैंटीन, कॉलेज परिसर में मस्ती करते दिखे।
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कैंपस में अमूमन ऐसा माहौल सत्र की शुरुआत होने पर ही देखने को मिलता है। कॉलेज भी दो साल बाद छात्रों के कैंपस पहुंचने से उत्साहित दिखे। कॉलेजों ने पहले दिन इतनी उपस्थिति की उम्मीद नहीं दिखी। छात्रों की भीड़ देखते हुए कॉलेजों को कोरोना संक्रमण क लेकर सावधानी भी लेनी पड़ी। कुछ कॉलेजों में पहले दिन अभिभावको को भी आने की अनुमति दी गई जिससे कि छात्रों की झिझक भी दूर हो और वह घबराएं नहीं। प्रथम वर्ष की छात्रा नैना ने कहा कि मैं कैंपस आने पर काफी उत्साहित हूं। ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई उतनी अच्छी नहीं जितनी ऑफलाइन से पढ़ाई की जा सकती है। एक अन्य छात्र नितिन जैन ने कहा कि दो साल कैंपस बंद था इतने लंबे से दोस्तों से मिल नहीं पा रहे थे। यहां आकर काफी उत्साह महसूस हुआ, कैंपस आकर खुलापन लग रहा है। मैं यहां आने के लिए इतना रोमांचित था कि रात भर नहीं नहीं आई।
कॉलेज की जिदंगी के दो साल खत्म हो गए
आंध्र प्रदेश केगुटुंर जिले के रहने वाले सना लिखिल ने कोरोना काल से पहले किरोड़ीमल कॉलेज में बीए प्रोग्राम में दाखिला लिया था। वह बताते हैं कि जब दाखिला लिया था तब पहला वर्ष था और अब अंतिम सेमेस्टर में हूं। एक साल 11 महीने बाद अपने दोस्तों से मिलकर काफी अच्छा लग रहा है। मैं दो साल कॉलेज की जिंदगी का आनंद नहीं ले सका। उन्हें पीजी में रहने के लिए भी काफी दिक्कत उठानी पड़ रही है। वह बताते हैं कि अब वह पीजी में प्रति बिस्तर 13 हजार रुपये दे रहे हैं। जबकि पहले यह राशि थोड़ी कम थी।
अब तक दोस्त नहीं बने
राजनीति विज्ञान के पहले वर्ष में दाखिला लेने वाली तान्या बताती हैं कि कॉलेज तो खुल गए लेकिन अब तक उनकेदोस्त नहीं बने हैं। आज जब कैंपस खुले तो वह अकेले ही घूम रही थी। वह बताती हैं कि कैंपस आकर उन्हें काफी कुछ सीखने समझने का मौका मिला। अब जब कॉलेज खुल गए हैं तो वह दोस्त भी बना लेंगी।