लखनऊ हाईकोर्ट में वकील और एक लीगल फर्म के प्रबंध निदेशक राकेश रावत 70 साल के हो चुके हैं। इस दौरान उन्होंने 35 वर्ष विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दी। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से सेवानिवृत्त राकेश अब उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में अपनी डिग्री पूरी करने के लिए आवेदन किया है। करीब 42 साल बाद अक्तूबर में परीक्षा देकर राकेश अपनी पीजी डिग्री पाठ्यक्रम को पूरा कर सकेंगे। उनका कहना है कि शरीर बुजुर्ग हुआ है, पढ़ाई का जज्बा युवाओं से कई गुना ज्यादा है।
डीयू में एलएलएम में 1979-80 बैच के छात्र रहे राकेश रावत बताते हैं कि लखनऊ से एलएलबी करने के बाद उनकी सीबीआई में नौकरी लग गई थी। इस दौरान उन्होंने पीजी डिग्री के लिए डीयू के एलएलएम कोर्स में आवेदन किया। उस समय लॉ की पढ़ाई के लिए कुछ कक्षाओं का आयोजन मंदिर मार्ग स्थित कैंपस होता था। कुछ कक्षाएं डीयू के मुख्य कैंपस में चलती थी। उस समय नौकरी के दौरान कई तबादले होते थे। इस वजह से पढ़ने का मौका नहीं मिलता था। पेपर देने में भी परेशानी होती थी।
पढ़ाई के दौरान उनका तबादला होने की वजह से वह पाठ्यक्रम के केवल 10 पेपर ही दे सके और दो पेपर के साथ-साथ थीसिस जमा नहीं कर सके। रावत बताते हैं कि इस दौरान उन्होंने कई बार अपनी पीजी डिग्री पूरी करने की कोशिश की, लेकिन राज्य दर राज्य तबादले की वजह से मौका नहीं मिला। इसके बाद डिग्री पूरी करने की इच्छा हमेशा के लिए दिल में ही रह गई। हालांकि, जब डीयू ने अपने शताब्दी वर्ष में अपने पूर्व छात्रों को डिग्री पूरा करने की पेशकश की तो यह किसी तोहफे से कम नहीं था। दिल्ली में रह रहे उनके एक मित्र ने उन्हें डीयू की इस पेशकश के बारे में बताया तो वह तुरंत आवेदन के लिए तैयार हो गए। रावत उस दौर के अपने अनुभवों के बारे में बताते हैं कि जिस समय वह डीयू में अध्ययन कर रहे थे तब प्रो. बख्शी लॉ की कक्षाएं लेते थे।
पढ़ाई के दौरान वह अक्सर अपनी दुविधाओं को लेकर उनके पास जाते थे। इसी तरह उस दौर में प्रो. ताहिर महमूद भी डीयू में लॉ के प्रमुख शिक्षकों में से एक थे। कई सार्वजनिक उपक्रम, सरकारी बैंक व सीबीआई में बैंकिंग व विदेश व्यापार सलाहकार के रूप में सेवा देकर 2016 में सेवानिवृत्त होने के बाद रावत ने हाईकोर्ट में प्रेक्टिस शुरू कर दी। वहीं, बीते तीन साल से वह एक लीगल फर्म में बतौर प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं।
डीयू अपने शताब्दी वर्ष में पूर्व छात्रों को डिग्री पूरा करने का अवसर दे रहा है। इसके तहत अभी तक 8500 से अधिक पूर्व छात्रों ने आवेदन किया है। वहीं, पूर्व छात्रों को परेशानी न हो, इसके लिए डीयू प्रत्येक छात्र के समय के हिसाब से प्रश्नपत्रों को तैयार करेगा। साथ ही, उस समय के सिलेबस का भी ध्यान रखेगा।
सुब्रोतो बागची भी 40 साल बाद करेंगे डिग्री पूरी
माइंडट्री कंपनी के सह संस्थापक और ओडिसा कौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सुब्रोतो बागची भी करीब 43 साल बाद डीयू से अपनी डिग्री पूरी करने जा रहे हैं। बागची ने 1978 में डीयू के लॉ सेंटर में दाखिला लिया था, लेकिन पढ़ाई छोड़ने के साथ उन्हें नौकरी की तलाश करनी पड़ी। आईटी उद्योगपति बागची ने काम की तलाश में कोलकाता का रुख किया। इसके बाद बेंगलूरू और फिर अमेरिका चले गए। इस दौरान उनकी छठी सेमेस्टर की परीक्षाएं रह गई, लेकिन अब वह अपनी डिग्री को पूरा करने जा रहे हैं।