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कामयाबी: पांच साल में गंगाराम अस्पताल ने तलाश लिया नया इलाज, 375 मरीजों पर हुआ सफल

Sat, 23 Oct 2021 08:47 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने खाने की नली से जुड़ी दुर्लभ बीमारी का नया उपचार निकाला है। 375 मरीजों के सफल ऑपरेशन भी किए गए हैं। इस तकनीक से ऑपरेशन प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ घंटे का वक्त लगता है और मरीज को अधिक एनेस्थिसिया देने की जरूरत भी नहीं पड़ती है।
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गंगाराम अस्पताल, दिल्ली - फोटो : Social media
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विस्तार
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दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने खाने की नली से जुड़ी दुर्लभ बीमारी का नया उपचार निकाला है। 375 मरीजों के सफल ऑपरेशन भी किए गए हैं। इस तकनीक से ऑपरेशन प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ घंटे का वक्त लगता है और मरीज को अधिक एनेस्थिसिया देने की जरूरत भी नहीं पड़ती है।
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दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने पांच साल में नया इलाज तलाश लिया है। इस दौरान 375 मरीजों पर ऑपरेशन के दौरान परीक्षण करने के बाद डॉक्टरों ने इसकी सफलता के बारे में अब जानकारी दी है। शुक्रवार को अस्पताल के वरिष्ठ डॉ. अनिल अरोड़ा ने बताया कि खाने की नली से जुड़ी दुर्लभ बीमारी से जुड़ा यह इलाज है।

इस बीमारी को ‘एकलेशिया कार्डिया’ के नाम से जानते हैं। इसके लिए नवीन तकनीक पीओईएम (ओरल इंडोस्कॉपिक माइटोमी) का इस्तेमाल किया गया। एंडस्कोपी के जरिए यह इलाज अब संभव हो पाया है। अस्पताल ने दावा किया कि उत्तर भारत में पीओईएम तकनीक से ऑपरेशन करने के मामले में संस्थान आगे है और बीते पांच साल में यहां के डॉक्टरों ने करीब 375 पीओईएम ऑपरेशन किए हैं। 
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डॉक्टरों ने बताया कि यह ऑपरेशन कराने वाले मरीजों की उम्र 14 से 90 साल के बीच थी और इनमें से 43 प्रतिशत महिलाएं व 57 प्रतिशत पुरुष थे।
दरअसल एकलेशिया कार्डिया बीमारी से खाने की नली प्रभावित होती है जिसमें मरीज को खाना निगलने में परेशानी होती है। चूंकि आहार नलिका भोजन को अंदर ले जाने जैसा महत्वपूर्ण कार्य करती है। 
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ऐसे में मरीजों को जब खाना अंदर ले जाने में दिक्कत होती है तो धीरे-धीरे उल्टी और फिर सीने में दर्द होता है। वजन घटने के साथ साथ अन्य तरह की बीमारियां भी होने लगती हैं। एक अनुमान के तहत एक लाख व्यक्तियों में से किसी एक को यह बीमारी होती है। अभी तक इस बीमारी के कई उपचार मौजूद हैं लेकिन अब पीओईएम तकनीक भी इसमें शामिल हो चुका है जिसकी खोज गंगाराम अस्पताल ने की है। 

इस तकनीक से ऑपरेशन प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ घंटे का वक्त लगता है और मरीज को अधिक एनेस्थिसिया देने की जरूरत भी नहीं पड़ती है। यह दर्द रहित और आरामदायक प्रक्रिया है।

इसके चलते अधिकांश मरीज अगले ही दिन से भोजन फिर से शुरू करने में सक्षम होते हैं और 48 घंटों के भीतर उन्हें छुट्टी दे दी जाती है। हाई रेजोल्यूशन एसोफैगल मैनोमेट्री और हाई डेफिनिशन एंडोस्कोप जैसी अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक प्रक्रियाओं के जरिए यह संभव हो पाया है। 
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