राजधानी में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी का सिलसिला लगातार जारी है। जुलाई से सितंबर के दौरान इलेक्ट्रिक वाहन सीएनजी और सीएनजी-पेट्रोल (हाइब्रिड ईंधन) से चलने वालों से अधिक तादाद में पंजीकृत हुए।
परिवहन विभाग के मुताबिक, इस दौरान पंजीकृत वाहनों में 7 प्रतिशत इलेक्ट्रिक और 6 प्रतिशत सीएनजी हैं। इस दौरान 1.5 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हुए। इनमें 7,869 इलेक्ट्रिक, 6,857 सीएनजी और 7,257 सीएनजी और पेट्रोल से चलने वाले हैं। 93,091 वाहन पेट्रोल या डीजल से चलने वाले हैं। दिल्ली सरकार के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के अच्छे परिणाम दिखने लगे हैं। अगस्त 2020 से ईवी पॉलिसी के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा हे।
तीन महीने में 30 ई-बसों का भी पंजीकरण
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अगस्त से अक्तूबर के दौरान 23,000 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत किए गए। इनमें 5,246 दोपहिया और 10,997 ई-रिक्शा हैं। जुलाई से सितंबर के दौरान 422 इलेक्ट्रिक कारें और 4 इलेक्ट्रिक बसें पंजीकृत की गईं। अगस्त से अक्तूबर के बीच पंजीकृत वाहनों की संख्या बढ़कर 1,415 हो गई, जिनमें 30 बसें हैं।
अब केवल इलेक्ट्रिक बसें खरीदी जाएंगी
परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि विभाग ने फैसला लिया है कि अब केवल इलेक्ट्रिक बसें ही खरीदी जाएंगी। विभाग की ओर से 450 सीएनजी बसों के लिए मंगवाई गई निविदा सीएनजी बसों के लिए अंतिम है। विभाग की ओर से 4,261 ई-ऑटो के लिए परमिट जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। इनमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण है। अब तक परमिट के लिए 12 हजार आवेदन मिल चुके हैं।