पार्किंसंस रोग से पीड़ित 51 वर्षीय सावित्री देवी बीते 9 साल से दवाओं के बिना ठीक से चल पाती और न ही करवट ले सकती थी। वह अपने हाथ और पैरों को नियंत्रित भी नहीं कर पाती थी। स्थिति गंभीर होने के बाद मरीज को गंगाराम अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में लाया गया। महिला में यह रोग शुरुआत में कंपकंपी और ब्रैडकिनेसिया (चलने-फिरने में कठिनाई) से हुई और बाद में गंभीर हो गई। दवा लेने के बावजूद उसके लक्षण बिगड़ते गए। साथ ही दवा से साइड इफेक्ट विकसित होने लगे। ऐसे में जांच के बाद डीप ब्रेन स्टिमुलेशन का फैसला लिया गया।
इस बारे में न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉ. श्रेय जैन ने कहा कि डीप ब्रेन स्टिमुलेशन एक नई सर्जरी है, जिसमें मस्तिष्क के विशेष क्षेत्रों को उत्तेजित करते हैं। यह दिमाग के पेसमेकर की तरह ही काम करता है। इस मामले में मस्तिष्क के सबथैलेमिक न्यूक्लियस को उत्तेजित करने की योजना बनाई। सर्जरी का उद्देश्य बीमारी को नियंत्रित करने और रोगी की जीवनशैली में सुधार करने में मदद करना है। यह विशेष रूप से पार्किंसंस रोग, कंपकंपी, डायस्टोनिया जैसी बीमारियों में उपयोगी है। इसका मूल्यांकन करने पर अवसाद और उन्माद जैसी मानसिक स्थितियों के लिए सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए।
जांच और ब्रेन इलेक्ट्रिक करंट रिकॉर्ड कर लोकेशन की पुष्टि
डॉ. जैन ने कहा कि मिनिमली इनवेसिव सर्जरी में खोपड़ी में दो छोटे छिद्रों के माध्यम से गहरे मस्तिष्क में इलेक्ट्रोड को द्विपक्षीय रूप से पारित किया जाता है। सर्जरी के दौरान मरीज की लगातार जांच और ब्रेन इलेक्ट्रिक करंट रिकॉर्ड कर लोकेशन की पुष्टि की गई। सर्जरी के दौरान उसके बातचीत, आंखों की गति और अंगों की शक्ति पर नजर रखी जा रही थी और यह देखा जा रहा था कि उसके लक्षणों में कैसे सुधार हो रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सर्जरी का प्रभाव कम से कम जटिलताओं के साथ अधिकतम हो।
सर्जरी के दौरान, उसने एक बिंदु पर बोलना बंद कर दिया, इसलिए इलेक्ट्रोड को बदल दिया गया और मरीज की बोलने की शक्ति वापस आ गई। इलेक्ट्रोड सही स्थिति में हैं यह सुनिश्चित करने के लिए सर्जरी के बाद सीटी स्कैन भी किया गया था। बाद में पेसमेकर की तरह छाती की दीवार में बैटरी डाली गई।
सर्जरी के बाद यह मरीज काफी हद तक ठीक हो गया है और दवाओं के किसी भी दुष्प्रभाव के बिना सामान्य जीवन जीने में सक्षम है। दवाओं की खुराक कम हो गई है और उनके दुष्प्रभाव कम से कम हैं। उसके हाथ-पैर कांपने के लक्षणों में काफी सुधार हुआ है। वह अब चीजों को ठीक से पकड़ सकती है।