नजफगढ़ में एम्स के रेफरल अस्पताल में नए साल से सेवाएं मिलनी शुरू हो जाएगी। 100 बेड के इस अस्पताल के लिए स्टाफ की भर्ती हो चुकी है, वहीं दिल्ली नगर निगम से कुछ मंजूरी का इंतजार है, जो जल्द मिलने की उम्मीद है। संभावना है कि साल 2023 के शुरूआती महीनों में अस्पताल पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू कर देगा। अस्पताल के शुरू होने के बाद बाहरी दिल्ली के अलावा हरियाणा के झज्जर, बहादुरगढ़ से रहने वाले हजारों मरीजों को फायदा होगा।
100 फीसदी ऑक्सीजन बेड की सुविधा के साथ तैयार हुए इस अस्पताल में विशेष तौर पर इमरजेंसी सेवाओं को विकसित किया गया है। यहां बनाए गए आपातकालीन विभाग के ऑब्जर्वेशन वार्ड को मुख्य अस्पताल के साथ कनेक्ट किया जाएगा। साथ ही जरूरत पड़ने पर मरीज को एम्स या सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया जाएगा।
इस संबंध में अस्पताल के प्रमुख डॉ. सीएस अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल बनाने का पूरा काम खत्म हो गया है, कुछ छोटे-मोटे काम रह रहे हैं जो अगले कुछ सप्ताह में खत्म हो जाएंगे। वहीं दिल्ली नगर निगम से मंजूरी लेने की दिशा में भी प्रयास तेज हो गए हैं। उन्होंने कहा कि मंजूरी मिलने के साथ ही अस्पताल में सेवाएं शुरू कर दी जाएगी। हम उम्मीद कर रहे हैं कि नए साल में इस अस्पताल को शुरू कर दिया जाएगा। यहां के लिए स्टाफ की भर्ती हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल के इमरजेंसी में दो बेड रखे जाएंगे। इसके अलावा ऑब्जर्वेशन वार्ड भी होगा। साथ ही 100 बेड के अस्पताल में गायनी, बाल रोग, मेडिसन, नेत्रविज्ञान सहित अन्य सभी सेवाएं होंगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल के सभी बेड ऑक्सीजन से कनेक्ट होंगे। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि शुरूआती दौर में ओपीडी की सुविधा शुरू होगी। उसके बाद इनपेशेंट की सेवाओं का विस्तार किया जाएगा।
गंभीर मरीजों को भेजा जाएगा एम्स
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि अस्पताल में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी जैसी एंडवांस सुविधा नहीं होगी। ऐसे मरीजों को तुरंत एम्स या सफदरजंग रेफर कर दिया जाएगा। हालांकि अस्पताल से एम्स या सफदरजंग की दूरी काफी है, इन मरीजों की हालत को देखते हुए दूसरी व्यवस्था भी की जा सकती है। इस दिशा में भी विचार किया जा रहा है।
लंबे इंतजार के बाद तैयार हुआ अस्पताल
नजफगढ़ के प्राइमरी हेल्थ सेंटर में तैयार हुए इस अस्पताल के लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा। साल 2004 में केंद्र सरकार ने रेफरेल यूनिट बनाने का आदेश दिया था। साल 2007 में केंद्र सरकार ने यहां 35 बेड का अस्पताल बनाने की मंजूरी दे दी, लेकिन अस्पताल का काम शुरू नहीं हुआ। 28 फरवरी 2014 में यहां केवल शिलांयास हुआ। वहीं साल 2018 में सांसद प्रवेश वर्मा ने इसका शिलान्यास किया, लेकिन कई कारणों से फिर देरी हुई। अब अस्पताल की बिल्डिंग का निर्माण कार्य पूरा हो गया है।