पिछले साल दिसबंर में हुआ उबर कैब रेप केस हो या निर्भया के बलात्कार की घटना, पुलिस ने अगर इन मामलों को गंभीरता से लिया होता तो शायद द्वारका में एक वहसी टैक्सी ड्राईवर फिर से बलात्कार की वैसी ही दर्दनाक घटना को अंजाम न दे पाता।
असल में द्वारका में हुई इस घटना का आरोपी ड्राईवर भी उबर कैब ड्राईवर और निर्भया रेप के दोषियों की तरह ही पहले से कई मामलों में आरोपी रह चुका था। इसके बावजूद न तो उसका लाइसेंस कैंसिल किया गया और न ही उसे कैब चलाने से रोकने की कोई कोशिश की गई।
रमेश कुमार ने न सिर्फ गुरुवार रात टैक्सी परमिट शर्तों का उल्लंघन किया बल्कि उसने एक ही कैब में एक से ज्यादा लोगों को बैठाने का भी अपराध किया।
टैक्सी में एक से ज्यादा सवारी बैठाना गलत
आरोपी ड्राईवर रमेश कुमार पर पहले से दो मामले चल रहे हैं और इनमें से एक मामले में वह जेल भी जा चुका है। असम में रमेश जिस कैब को चला रहा था उसमें एक समय में एक ही पैसेंजर को बिठाया जा सकता है लेकिन उसने इसका इस्तेमाल पब्लिक कैब की तरह किया और ज्यादा लोगों को कैब में बैठा लिया।
दिल्ली में कैब ड्राईवर्स के लिए यह मामूली बात है क्योंकि इस बात के लिए न तो सवारियां मना करती हैं न ही पुलिस कभी भी इस बात की जांच करती है।
महिला ने खुद अपने बयान में कहा कि टैक्सी में पहले से एक बुजूर्ग सवार थे जिसे देखकर ही उसमें बैठने का फैसला किया। अगर उस टैक्सी में पहले से कोई सवारी न होती तो वह टैक्सी में चढ़ती और बलात्कार की इस घटना को रोका जा सकता है।
टैक्सी में नहीं था जीपीएस मीटर
जिस टैक्सी में यह घटना हुई उसमें जीपीएस बेस्ड मीटर तक नहीं लगा था। जबकि ट्रांसपोर्ट विभाग ने सभी कैब ड्राइवर्स सहित ऑटो चालकों के लिए यह अनिवार्य कर रखा है।
खुद ऑटो रिक्शा और टैक्सी यूनियनें ही ट्रांसपोर्ट विभाग के इस फैसले के खिलाफ हैं और लंबे समय से इसका विरोध करती रही हैं।
अभी हाल ही में इन संगठनों ने जनसुनवाई के दौरान गोपाल राय से मांग की थी कि जीपाएस मीटर की अनिवार्यता को वाहनों के लिए खत्म किया जाए।
कार पर लगी थी प्रतिबंधित फिल्म
जिस टैक्सी में महिला के साथ बलात्कार हुआ उसके शीशे पर रंगीन फिल्म लगी हुई थी। जबकि इस तरह के रंगीन फिल्मों का दिल्ली में प्रचलन पूरी तरह प्रतिबंधित है।
दिल्ली में 7,224 काले और नीले पट्टी वाली टैक्सी रजिस्टर्ड हैं। किसी भी ऑटो की तरह इन सभी टैक्सी में जीपीएस मीटर का लगा होना और ड्राईवर के लिए पब्लिक सर्विस व्हिकल बैज लगाना अनिवार्य है।
अगर पुलिस ने समय रहते इस टैक्सी पर रंगीन फिल्म लगाने के लिए कार्यवाही की होती तो संभवतः घटना से बहुत पहले ही दोषी को सबक सिखा दिया गया होता।
चलती कार से फेंक देना चाहता था उसे
पुलिस ने बताया कि रमेश कुमार गुरुवार रात शिकार की तलाश में ही इधर-उधर भटक रहा था। इस दौरान उसने कुछ यात्रियों को बिठाने और उतारने का नाटक भी किया।
पुलिस पूछताछ में रमेश ने स्वीकार किया कि उसने महिला को जान से मारने का भी प्लान बना लिया था। उसने तय कर लिया था कि अगर पीड़िता ने ज्यादा विरोध किया तो उसे खत्म कर देगा।
इतना ही नहीं जब पुलिस ने उसका पीछा करना शुरु किया तो वह इस फिराक में था कि चलती गाड़ी से महिला को धकेल दे ताकि पुलिस उसका पीछा करना छोड़ दे। लेकिन इससे पहले कि वह अपने इरादे में कामयाब होता पुलिस ने उसे घेर लिया।
रमेश ने पहल भी किया है अपराध
2012 में कार में खरोंच लगने पर रमेश ने एक शख्स की पिटाई कर दी थी। इस मामले में उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी की गई थी। जबकि इससे एक साल पहले वह नजफगढ़ में एक शख्स को अपनी कार से धक्का मारने के मामले में भी आरोपी रह चुका है।
अगर इस मामले को गंभीरता से लिया गया होता तो बहुत पहले ही उसका लाइसेंस रद्द हो चुका था। आम तौर पर रमेश शाम के समय अपनी गाड़ी द्वारका मोड़ पर ही लगाता था जिससे कि उसे नजफगढ़ की ओर जाने वाली कोई सवारी मिल सके। असम में रमेश नजफगढ़ का ही रहने वाला है। गुरुवार को महिला सवारी बैठने के साथ ही उसने अपना प्लान बदल लिया।
उसने तय किया कि रेप के बाद वह महिला को सेक्टर 23 में ही कहीं फेंक देगा क्योंकि यह इलाका रात तो क्या दिन में भी बेहद सूनसान रहता है।