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यूपी के दो माफियाओं पर अब दिल्ली में तय होंगे आरोप

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कोयला कारोबारी को धमकी देने व रंगदारी के मामले में अंडरवर्ल्ड डॉन बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह को प्रथमदृष्टया दोषी मानते हुए आरोप तय करने का आदेश दिया है। बनारस निवासी कारोबारी की शिकायत पर दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 2007 में मुकदमा दर्ज किया था।
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पटियाला हाउस अदालत के सीएमएम संजय खनगवाल ने डॉन बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह के खिलाफ रंगदारी, धमकी देने, फर्जी दस्तावेज बनाने व इस्तेमाल करने व आपराधिक साजिश संबंधी धाराओं में आरोप तय करने का आदेश दिया है।
 
इस मामले में आरोपियों के खिलाफ 24 अप्रैल को आरोप किए जाएंगे। दिल्ली पुलिस ने सुधीर सिंह की शिकायत पर अगस्त 2007 में यह मामला दर्ज किया था और जांच के बाद मार्च 2008 में बृजेश सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
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इसके बाद पुलिस ने 2013 में त्रिभुवन सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस ने चार्जशीट के साथ मोबाइल कॉल रिकॉर्ड व करीब तीन दर्जन गवाहों की सूची पेश की थी।

आठ साल पुराना है मामला

बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेश आनंद व अखंड प्रताप सिंह ने आरोपों पर बहस करते हुए कहा कि उनके मुवक्किलों के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता। इस मामले में कोई रंगदारी नहीं ली गई।

शिकायतकर्ता को जिस नंबर से फोन आया था वह उनके मुवक्किलों का नहीं बल्कि बनारस के किसी पीसीओ का है। पुलिस ने इस पीसीओ के मालिक को गवाह तक नहीं बनाया है।

पुलिस की जांच पर सवाल उठाते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि इस मामले में पुलिस व अभियोजन पक्ष की जांच बेहद संदेहास्पद है। पुलिस के पास ऐसा एक भी गवाह नहीं है जिसने बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह को उक्त पीसीओ से फोन करते हुए देखा है।

यह मामला आठ साल पुराना है और इस पर साढ़े छह साल तक आरोपों पर बहस नहीं हुई। इसके बावजूद उनके मुवक्किलों को जमानत न देकर जेल में रखा गया है।
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फोन कर मांगी 50 लाख की रंगदारी

पुलिस की एफआईआर के मुताबिक कारोबारी सुधीर सिंह 28 अगस्त 2007 को कारोबार के सिलसिलेे में दिल्ली आए थे। यहां उनके मोबाइल पर बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह ने धमकी देकर 50 लाख रुपये दीपक शाह और 25 लाख रुपये संजय सिंह के पास भेजने के लिये कहा था।

इसके अलावा उन्हें अपने साझेदार गजेंद्र सिंह की हत्या में गवाही से हटने और कोयले का कारोबार बंद करने की भी धमकी दी थी।

सुधीर सिंह ने इसकी शिकायत अगले दिन स्पेशल सेल के संयुक्त आयुक्त को दी थी। इसके बाद पुलिस ने बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर दिया था। जिस नंबर से सुधीर सिंह को फोन किया गया था वह नंबर बनारस केे किसी पीसीओ का पाया गया था।
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