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मतदाता हैं खामोश... गली-गली अपील कर रहे प्रत्याशी

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नोएडा (संजय शिशौदिया)। कोरोना संक्रमण काल की वजह से चुनाव आयोग ने इस बार जो सख्ती लगाई है, उससे प्रदेश में होने जा रहे पहले चरण के चुनाव बडे़ ही फीके नजर आ रहे हैं। न तो चुनावी जनसभा, न रोड शो और न ही कोई वाहन रैली। सभी दलों के प्रत्याशी गली-गली जाकर अपने पक्ष में मतदान की अपील कर रहे हैं, और मतदाता है कि पूरी तरह से खामोशी समेटे हुए है। मतदाताओं की यही खामोशी अब उम्मीदवारों की चिंता का कारण बनने लगी है। मतदान में अब चंद ही दिन बाकी हैं, लेकिन डोर-टू-डोर जनसंपर्क और डिजिटल संवाद के माध्यम से प्रत्याशी अभी तक मतदाताओं के रुख को भांप नहीं पा रहे हैं।
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सिर्फ डोर-टू-डोर जनसंपर्क, जनसभा एक भी नहीं
पहले चरण के चुनाव के लिए 10 फरवरी को मतदान होना है। इसके बावजूद अब तक किसी भी दल ने एक भी जनसभा नहीं की है, जबकि चुनाव आयोग ने कोविड नियमों का पालन करते हुए 500 लोगों तक की जनसभा को मंजूरी दे रखी है। पर्चा दाखिल करते ही सपा, बसपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों ने यहां अपने-अपने स्टार प्रचारकों को बुलाने की बात कही थी। बसपा प्रत्याशी जहां पार्टी सुप्रीमो मायावती और सतीश मिश्रा की जनसभा होने का दावा कर रहे थे, वहीं समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और रालोद प्रमुख जयंत चौधरी की जनसभा की बात कही थी। कांग्रेस प्रत्याशी भी यहां से प्रियंका गांधी के माध्यम से अपने पक्ष में हवा बनाना चाहती हैं, जबकि आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी ने संजय सिंह, मनीष सिसोदिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बुलाने की बात कही थी।
गलियों में घूम रहे भाजपा के स्टार प्रचारक
भाजपा के स्टार प्रचारक प्रतिदिन नोएडा की गलियों में तो घूम रहे हैं, मगर जनसभा अब तक भाजपा प्रत्याशी द्वारा भी नहीं की गई है। स्टार प्रचारकों के रूप में भाजपा के बडे़ चेहरे रमापति राम त्रिपाठी, संजय भाटिया, रवि किशन, अशोक कटारिया, डॉ. महेश शर्मा, सुरेंद्र नागर, विमला बाथम आदि यहां गलियों में घूमकर मतदाताओं को साधने की कोशिश कर चुके हैं। प्रतिदिन भाजपा का कम से कम एक स्टार प्रचारक नोएडा जरूर आता है। इसके बावजूद पार्टी भी जनसभा के मामले में अपना खाता नहीं खोल पाई है।
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सबका साथ-सबकी बात कर रहा मतदाता
पांच साल इंतजार के बाद अब बारी मतदाताओं की है। मतदाता भी इसे बखूबी जानते हैं। यही कारण है कि अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। एक ही सोसाइटी में एक ही दिन में विभिन्न दलों के नेता पहुंचकर जनसंपर्क कर रहे हैं और मतदाता भी सभी प्रत्याशियों को उनके पक्ष में मतदान करने का आश्वासन दे रहा है। ऐसे ही एक मतदाता से जब बात की गई तो उनका कहना था कि 5 साल तो नेताजी ही आश्वासन देंगे, अभी तो हमें देने दो।
छूट मिले तो बने बात
ज्यादातर प्रत्याशियों को चुनाव आयोग की छूट का इंतजार है। विभिन्न राजनीतिक पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि मात्र 500 लोगों की भीड़ के लिए स्टार प्रचारक जनसभा के लिए सहमति नहीं दे रहे हैं। ऐसे में उम्मीदवार ही परिवार और समर्थकों के साथ गली-कूचों की खाक छान रहे हैं। हालांकि सभी दलों का यह मानना है कि जब तक रैली या जनसभा का आयोजन नहीं होगा, तब तक मतदाताओं की स्थिति समझना आसान बात नहीं है।
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