नगीना। जब अलवर और भरतपुर रियासत के मुसलमानों को दिल्ली की तरफ खदेड़ा जा रहा था। तब गांधी जी ने कहा था कि अभी गांधी जिंदा है मुसलमानों तुम देश छोड़ के मत जाओ। यह देश तुम्हारा भी है। मेरे कहने पर रुक जाओ। गांधीजी की विनती पर यहां से पाकिस्तान जा रहे काफिलों ने अपने वतन, अपनी मिट्टी को छोड़कर न जाने का फैसला लिया। ऐसा कहना रहा अखिल भारतीय शहीदाने मेवात सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरफूद्दीन खान का। उन्होंने आजादी के समय मेवात क्षेत्रों के मुस्लिमों की व्यथा को बताया।
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान जाने से पहले महफूज ठिकानों की तलाश में यहां के मुसलमान अपने घरों से खाने-पीने का सामान, जेवरात, नगदी रखकर घोड़ा गाड़ी व बैलगाड़ियों में बैठकर अपने परिवार के साथ चल पड़े थे। अधिकतर लोग पैदल थे। नगीना, नूंह, सोहना, गुरुग्राम, दिल्ली के आसपास डेरे डाल लिए। मेवात क्षेत्र के लाखों की संख्या में लोग स्वतंत्रता सेनानी चौधरी मोहम्मद यासीन मेेव के इंतजार में ठहरे हुए थे। जनता को 18 दिसंबर की शाम पता चला कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी उनसे मिलने के लिए आ रहेे हैं तो लोग रात भर नहीं सोए। इंतजार में अगले दिन दोपहर का समय भी गुजर चुका था। उनके मन में अनेकों सवाल उमड़ रहे थे। आखिरकार 19 दिसंबर 1947 का वो एतिहासिक दिन भी आया जब घासेड़ा मेवात की धरती पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के कदम पड़े। तब तक पठान जत्थे की देखरेख में तीन काफिले पाकिस्तान रवाना हो चुके थे। बाकी काफिलों में बैठे लोगों ने गांधी पर भरोसा कर यहां से न जाने का फैसला लिया। देश को आजाद हुए आज 75 बरस हो गए लेकिन मेवात में अभी भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, परिवहन और कृषि के क्षेत्र में सुधार की काफी गुंजाइश बाकी है।
घासेड़ा का नाम बदला है किंतु गांधी ग्राम घासेड़ा की तस्वीर नहीं बदली। गांधी कहते थे मेरा देश एक बगीचा है जिसमें अलग-अलग फूल खिले हैं। -नूर मोहम्मद, घासेड़ा।
गांधी का काफिला पलवल से घासेड़ा कुआं पहुंचा। गांधी जमीन पर लेट गए, तुम्हें पाकिस्तान जाना है तो मेरी लाश से गुजर कर जाना पड़ेगा।- हाजी ईसा, घासेड़ा।
गांधी बोले अंग्रेजों ने हमें लड़ाया है। तुम पाकिस्तान मत जाओ। इसलिए पाकिस्तान नहीं गए। गांधी नहीं आते तो हम भी पाकिस्तान चले जाते। - बत्तन खान, घासेड़ा।
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कैप्शन: हाजी ईशा, बत्तन खान, मियाजी नूर मोहम्मद।
कैप्शन: घासेड़ा शिव बगीची कुआं जहां गांधीजी आए।
कैप्शन: अब बने स्कूल की जगह पर लोगों को संबोधित किया।
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