हरिप्रकाश बावा
बिलासपुर। बिलासपुर स्थित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में करीब दो माह पहले बिजली के कनेक्शन काट दिए गए। इससे प्रयोगशाला में मृदा (मिट्टी) जांच का काम प्रभावित हो रहा है। बिना बिजली के मिट्टी की जांच नहीं हो पा रही है। इससे यहां नमूने काफी संख्या में जमा हो गए हैं। कुछ नमूनों को छोलस स्थित प्रयोगशाला में भेज कर जांच कराई जा रही है। इसमें काफी अधिक समय लग रहा है।
जिले में किसानों की मदद के लिए दो मृदा जांच प्रयोगशाला स्थापित की गई हैं। ये छोलस और बिलासपुर में हैं। बिलासपुर स्थित प्रयोगशाला में बिल बकाया होने के कारण करीब दो माह पहले बिजली के कनेक्शन काट दिए गए। इस कारण यहां आने वाले दनकौर, बिलासपुर, जेवर, रबूपुरा समेत अन्य क्षेत्रों के किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच समय से नहीं हो पा रही है।
प्रयोगशाला प्रभारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि बिजली विभाग का करीब छह हजार रुपये का बिल बकाया है। इसके कारण बिजली विभाग के कर्मचारी व अधिकारियों ने प्रयोगशाला की बिजली काट दी। करीब दो माह से प्रयोगशाला अंधेरे में डूबी है। यहां आने वाली मिट्टी के नमूनों को छोलस स्थित दूसरे लैब में भेजकर जांच कराई जा रही है। इसमें ज्यादा समय लग रहा है।
उन्होंने बताया कि जिले के लोग अपने खेतों की मिट्टी का परीक्षण कराने आते हैं। जिनमें अधिकांश जेवर, दादरी, दनकौर क्षेत्र से होते हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जिप्सम, सल्फर की कमी है। अधिकांश किसान बिना परीक्षण के ही यूरिया खेतों में डालते हैं, जो उचित नहीं है। साल 2020-21 में कुल 704 किसानों के खेतों की मिट्टी परीक्षण में पोटाश, सल्फर, जिप्सम आदि की कमी पाई गई है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि खेतों में कम यूरिया प्रयोग करना चाहिए। जैविक खेती करनी चाहिए, कच्चा गोबर खेतों में नहीं डालना चाहिए। इससे खेतों में दीमक लगने की संभावना अधिक हो जाती है।