नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के वेतन एवं पेंशन भुगतान में देरी पर उत्तरी दिल्ली नगर निगम को कड़ी फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर वेतन-पेंशन भुगतान पर देरी होती है तो उसकी संपत्तियों को जब्त कर बिक्री का आदेश दिया जाएगा।
अदालत ने इस पर गौर किया कि उत्तरी नगर निगम ने वित्तीय संकट के मद्देनजर अपने अस्पतालों को केंद्र अथवा दिल्ली सरकार को सौंपने के मुद्दे पर अभी तक कोई विचार नहीं किया है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति जसमीत सिंह की खंडपीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर उत्तरी निगम कोई तत्परता नहीं दिखा रही है जबकि इसकी जरूरत है। खंडपीठ ने कहा कि भविष्य में वेतन-पेंशन के भुगतान में देरी सहन नहीं की जाएगी। अदालत निगम की संपत्तियों को जब्त करने और उनकी बिक्री का आदेश देने में संकोच नहीं करेगी।
हाईकोर्ट ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम से कहा था कि वह फैसला करे कि उसके छह अस्पतालों को केंद्र या दिल्ली सरकार के सुपुर्द किया जाना चाहिए या नहीं। इसके बाद निगम की ओर से अधिवक्ता दिव्य प्रकाश पांडे ने कोर्ट के समक्ष कहा था कि आयुक्त ने इस कदम उठाया है और ये मुद्दा पार्षदों के समक्ष है। उन्होंने कहा कि सदन ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि इन दोनों बातों पर नहीं अड़ सकती कि उन अस्पतालों से कोई आय नहीं होती और केवल खर्च होता है, उन्हें अपने पास रखेगी। वहीं इस बात को भी कहेगी कि कर्मचारियों को वेतन-पेंशन देने के लिए उसके पास फंड नहीं हैं।
अदालत ने कहा कि आगे से जब भी फंड की कमी की बात करेंगे तो हम जानते हैं कि हमें क्या करना है। अगली बार से आपकी संपत्तियों को जब्त की जाएंगी। इसकी शुरुआत निगम आयुक्त कार्यालय से की जाएगी। निगम के वकील ने पीठ को बताया कि जून तक पेंशन और जुलाई माह तक के वेतन का भुगतान कर दिया गया है। - एजेंसी