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Sharjeel Imam: शरजील इमाम ने बताया जेल में जान का खतरा, बोला- सेल में मारपीट करते हुए उसे आतंकवादी और देशद्रोही कहा

Tue, 05 Jul 2022 06:54 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

जेएनयू के पूर्व छात्र शरजील इमाम ने जेल में अपनी जान को खतरा बताया है। इमाम ने आरोप लगाया कि जेल के सहायक अधीक्षक ने तलाशी की आड़ में आठ-दस लोगों ने साथ उनके सेल में प्रवेश किया और उनके साथ मारपीट करते हुए उसे आतंकवादी और देशद्रोही कहा। 
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शरजील इमाम (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
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विस्तार
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दिल्ली दंगो की साजिश के मामले में आरोपी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के पूर्व छात्र शरजील इमाम  ने सोमवार को अदालत में अपनी जान के लिए खतरा बताते हुए आवेदन दायर किया है। 

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विशेष न्यायाधीश अमिताभ रावत के समक्ष आवेदन पर 14 जुलाई को सुनवाई की संभावना है। शरजील ने आरोप लगाया कि हाल ही में जेल के सहायक अधीक्षक ने तलाशी की आड़ में आठ-दस लोगों के साथ तिहाड़ जेल में उनके सेल में प्रवेश किया और उनके साथ मारपीट करते हुए उसे आतंकवादी और देशद्रोही कहा।

कड़कड़डूमा अदालत स्थित लिंक मजिस्ट्रेट ने हाल ही में इमाम के वकील इब्राहिम द्वारा दायर आवेदन पर जेल अधिकारियों को 'आवेदक पर किए गए हमले और तलाशी' के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और अधिकारियों को किसी भी 'आगे के हमले' से बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया गया था। उनके वकील ने आरोप लगाया कि करीब 8 से 10 अपराधी 30 जून की शाम 'तलाशी के नाम पर' इमाम के सेल में आए, उन्होंने इमाम की किताबें और कपड़े फेंक दिए और उनके साथ मारपीट की।
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याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि जेल अधिकारियों को कथित घटना के गुरुवार 30 जून को शाम 7:15 बजे से रात 8:30 बजे तक जेल के सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड किए गए वीडियो को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया जाए। अब इस मामले की सुनवाई 14 जुलाई को होगी।

इमाम के वकील ने कहा कि उन्हें हमले के बारे में सोमवार 4 जुलाई को सूचित किया गया, जब उन्हें कठोर यूएपीए धाराओं के तहत दर्ज दंगों के मामले में पेश होने के लिए कड़कड़डूमा अदालत में पेश किया गया था। इब्राहिम ने कहा मारपीट का यह पहला मामला है जिसका खुलासा किसी दंगा आरोपी ने किया है। उसके सेल के अंदर नियमित रूप से तलाशी अभियान चलाया जाता है और उन्हें कभी भी प्रतिबंधित सामग्री नहीं मिली है। इस बार जेल कर्मचारी दोषियों के साथ आए, जो कि अवैध है। केवल जेल कर्मचारी ही कक्षों की जांच कर सकते हैं।

इमाम, अपने कथित भड़काऊ भाषणों के लिए देशद्रोह के आरोपों का भी सामना कर रहे हैं, जनवरी 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं। दिल्ली पुलिस ने मामले में इमाम के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने केंद्र सरकार के प्रति घृणा, अवमानना और असंतोष को भड़काने वाले भाषण दिए और लोगों को उकसाया जिसके कारण दिसंबर 2019 में हिंसा हुई।

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