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दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी: कोर्ट है... कसीनो नहीं कि कानूनी दावे का मुखौटा पहना कर जुए के दांव लगाएं वादकारी

Tue, 05 Jul 2022 06:48 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाईकोर्ट ने यह बात एक ऐसे मामले में कही जहां संपत्ति की खरीद में लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। मुकदमा करने वाले को पता चला कि खरीद के लिए हुए पैसों के लेनदेन की जांच होगी तो उसने जांच से बचने के लिए मुकदमा वापस लेने की अनुमति मांगी थी। 
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानूनी प्रक्रिया का गलत फायदा उठाकर मुकदमे करने वालों को दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ी चेतावनी में कहा कि 'कोर्ट कोई कसीनो नहीं है जहां अपने कानूनी दावे का मुखौटा पहनकर वादकारी जुए के दांव लगाने आ जाएं।' संपत्ति के एक विवाद की सुनवाई कर रहे जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने सोमवार को कहा कि आंखों पर पट्टी बंधी न्याय की देवी से कानून का माखौल बनाने वाले बेईमान मुकदमेबाजों की शरारतें, धोखे व छल छिप नहीं सकते। 

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उन्होंने कहा कि अदालतें गंभीर दावों के लिए बनी हैं। फर्जी दावे करने वालों और पकड़े जाने या हार नजर आने पर मुकदमे वापस लेने वालों के लिए नहीं। अगर कोर्ट को लगे की कपट हो रहा है, तो मुकदमेबाजों को कोई लाभ नहीं लेने देना चाहिए, बल्कि ऐसा होने की संभावना खत्म कर देनी चाहिए। 

हाईकोर्ट ने यह बात एक ऐसे मामले में कही जहां संपत्ति की खरीद में लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। मुकदमा करने वाले को पता चला कि खरीद के लिए हुए पैसों के लेनदेन की जांच होगी तो उसने जांच से बचने के लिए मुकदमा वापस लेने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि मुकदमा वापस लेने का उसे पूर्ण अधिकार नहीं है। कोर्ट बेईमान मुकदमेबाजों से निपटने में निशक्त नहीं है। 

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