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बैरिकेड की जिम्मेदार मोदी सरकार लिखकर किसानों ने दिया जवाब

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‘बैरिकेड की जिम्मेदार मोदी सरकार’ लिखकर किसानों ने दिया जवाब
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कौशांबी। यूपी गेट पर 11 महीने से चल रहे किसान आंदोलन में इन दिनों दिल्ली जाने वाला रास्ता बंद होने को लेकर मामला गरमाया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में रास्ता खोलने के लिए याचिका दायर हुई थी। सुनवाई के बाद यूपी गेट आंदोलन स्थल पर किसानों ने तंबू का परदा उतारकर रास्ता साफ कर दिया। शुक्रवार को किसान नेता राकेश टिकैत ने दिल्ली-गाजीपुर द्वार पर ‘बैरिकेड की जिम्मेदार मोदी सरकार’ और ‘मोदी सरकार रास्ता खोलो’ जैसे स्लोगन लिखकर माहौल और गर्म कर दिया। राकेश टिकैत ने खुद हरे रंग के पेंट से सभी बैरिकेड पर उक्त स्लोगन लिखे।
किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि शहर के लोगों को हो रही परेशानियों के लिए सरकार व पुलिस जिम्मेदार है, क्योंकि रास्ता किसानों ने नहीं, बल्कि इन्होंने बंद किया हुआ है। यूपी गेट पर किसानों ने सिर्फ परदा लगाया हुआ था। अब वो परदा हटा दिया गया है, लेकिन परदे के पीछे सरकार बैठी है। आंदोलन में बैठे किसान अपने अधिकार की बात सरकार से करना चाहते हैं। मगर सरकार पिछले नौ महीने से चुप है। उन्होंने यह भी कहा कि किसान यहां पर रास्ते बंद करने नहीं आए हैं। वह तो केंद्र सरकार से अपना अधिकार लेने आए हैं। 2022 में यूपी चुनाव के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अबकी बार माहौल पूरा अलग होगा। सरकार को अपनी गलती का पता चल जाएगा। तंबू और बांस हटाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आंदोलन स्थल पर दिवाली की सफाई हो रही है। किसानों को किसी तरह की परेशानी ना हो। इसके लिए सभी को साफ-सफाई के लिए बोला गया है। आम जनता के लिए आज भी किसानों ने रास्ता खोला हुआ है। वहीं, जिलाध्यक्ष चौ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि आंदोलन स्थल पर अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए भाकियू के तमाम पदाधिकारियों का आह्वान किया गया है। सभी को ट्रैक्टर और वाहनों से चार-चार दिन आंदोलन स्थल पर बने रहने के लिए कहा गया है।
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यूपी गेट पर सभी बैरिकेड रंगने की योजना
किसानों की योजना है कि रास्ता बंद होने के सवाल पर अब यूपी गेट के सभी बैरिकेड पर मोदी सरकार से रास्ता खोलने के लिए लिखा जाएगा। इसके लिए किसानों ने हरे रंग का पेंट भी मंगवाया है। शुक्रवार को किसान अलग-अलग जगह पर रखे बैरिकेड पर रास्ता खोलने के लिए लिखते नजर आए। बता दें कि इससे पहले किसानों ने यूपी गेट पर हरे रंग से किसान क्रांति गेट लिखा था। जगह-जगह किसानों ने बोर्ड भी लगाया था। आंदोलन स्थल पर किसी को वाहन चालक को दिक्कत न हो। इसके लिए एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य वाहनों के लिए रास्ता बनाया हुआ था।
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