दूसरा डोज लगा नहीं, मिल गया प्रमाण पत्र
गाजियाबाद। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जिंदा ही नहीं मृतकों को भी दूसरा डोज लगने का मेसेज पहुंच रहा है। कई लोग ऐसे हैं जिनको पहला डोज तीन महीने पहले लग चुका है, लेकिन दूसरे डोज का मेसेज नहीं आया। केंद्र पर पहुंचने पर जानकारी दी जाती है कि आपका पहला डोज अपडेट नहीं हुआ है।
डॉ. जीपी मथूरिया का कहना है कि शुरुआती दौर में टीकाकरण में लगे स्वास्थ्यकर्मी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक ड्यूटी करते थे और उसके बाद लगाई गई वैक्सीन को पोर्टल पर अपलोड करना होता था। कई बार अपलोड करने का कार्य अगले दिन भी करना पड़ता था। हो सकता है कि इस दौरान बढ़े वर्क लोड और लगातार काम करने से डेटा मिस हो गया हो और बहुत से लोगों का टीकाकरण अपलोड ही नहीं हुआ। शुरू में इस तरह की शिकायतें भी कई अस्पतालों से मिली थीं। जहां 400 वैक्सीन खर्च हुईं, लेकिन पोर्टल पर महज 50 या 60 ही अपलोड हो सकीं थीं।
मौत के बाद दूसरा डोज लगने का आया मेसेज
- 20 नवंबर को मौत, सात दिसंबर को दूसरा टीका
लोनी के खन्ना नगर निवासी कुलदीप ने बताया कि उनके पिता फूल सिंह को पहला डोज सात सितंबर को लगा था। फूल सिंह के पेट में संक्रमण हो गया था, उनकी मौत 20 नवंबर को हो गई। सात दिसंबर को उनका दूसरा डोज अपडेट होने का मेसेज आया, मोबाइल पर प्रमाणपत्र भी अपडेट हो गया।
18 मार्च को मौत, 18 अक्तूबर को दूसरा डोज अपडेट
शास्त्रीनगर निवासी 79 वर्षीय विश्व बिहारी सक्सेना को 18 मार्च 2021 को कविनगर स्थित मानव अस्पताल में टीके का पहला डोज लगा था। 7 मई को उनका निधन हो गया। 18 अक्तूबर की शाम को उनके बेटे के मोबाइल फोन पर संदेश आया कि विश्व बिहारी सक्सेना को वैक्सीन का दूसरा डोज सफलतापूर्वक लग गया है।
16 अप्रैल को मौत, 22 नवंबर को दूसरा डोज लगा
- मोदीनगर निवासी गुरमैल को पहला डोज 16 अप्रैल को लगा था और उनकी मौत 2 मई को हो गई थी। मौत के छह महीने बाद 22 नवंबर को दूसरा डोज लगने का मेसेज उनकी पत्नी मनजीत कौर के मोबाइल फोन पर आया। मनजीत ने बताया कि उस समय वह लुधियाना में थीं।
13 मई को मौत, 28 नवंबर को दूसरा डोज लगने का आया मेसेज
वसुंधरा गार्डेनिया ग्रीन सोसायटी निवासी सतीश कुमार शर्मा ने बताया कि पत्नी विनोद बाला शर्मा (58) की कोरोना से 13 मई को मौत हो गई थी। विनोद बाला को 24 अप्रैल को पहला डोज लगा था। 28 नवंबर को दूसरा डोज लगने का सर्टिफिकेट अपलोड करने का मेसेज आ गया।
टीका लगवाने से पहले ही आ गया मेसेज
टीकाकरण कराने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। 23 नवंबर को यूपीएचसी वेद विहार कॉलोनी ब्लॉक -सी में टीका लगना था। सुबह करीब 10 बजे मेरे फोन पर टीकाकरण का प्रमाण पत्र जारी हो गया, जबकि उस समय तक टीका लगवाया भी नहीं था।
नंदिता झा, ट्रॉनिका सिटी
दूसरा टीका लगवाने के लिए काटना पड़ा चक्कर
मेरा पहला डोज सितंबर में लगा था, समय की व्यस्तता के कारण दूसरा डोज लगवा नहीं पाया था। मेरे पास दूसरा डोज लगने का मेसेज आ गया और सर्टिफिकेट भी डाउनलोड हो गया। डोज लगवाने सेंटर पर गया तो वहां टीका लगाने से मना कर दिया।
अंशुल, सॉफ्टवेयर इंजीनियर
दूसरा डोज लगवाने का मेसेज आया, 10 दिन बाद आ गया सर्टिफिकेट
पहला डोज आठ जुलाई को लगा था, दूसरा डोज लगवाने के लिए अक्तूबर में मेसेज आया था, कि दूसरा डोज एक महीने में लगवा सकते हैं। 20 अक्तूबर को दोबारा मेसेज आया कि दूसरा डोज सफलतापूर्वक अपडेट हो गया है।
विजेता सिंह
लिखित में लिया तब लगाया टीका
पहला डोज मई में लगा था। अगस्त में दूसरा डोज लगना था लेकिन टीका लगवाना भूल गया। सितंबर में मेसेज आया कि दोनों डोज अपडेट हो गया है। अब प्रमाणपत्र डाउनलोड कर लें। इसके बाद दूसरा डोज लगवाया ही नहीं।
ललितपुरी
पोर्टल में दिक्कत
पोर्टल में कुछ दिक्कत होने से कई बार मेसेज चला जाता है। अगर किसी के साथ इस तरह की परेशानी आई है तो वह सीएमओ कार्यालय में लिखित में दे दे कि बिना वैक्सीनेशन प्रमाण पत्र अपडेट हो गया है। उसके बाद उसे टीका लगवा दिया जाएगा।
डॉ. नीरज अग्रवाल, प्रतिरक्षण अधिकारी
पहले टीका लगेगा, बाद में सत्यापन
इस तरह की शिकायत आई है। लोगों को परेशानी न हो, इसलिए अब पहले टीका लगेगा, उसके बाद उसका सत्यापन किया जाएगा। यह निर्देश मंगलवार को जारी कर दिया गया है।
डॉ. भवतोष शंखधार, सीएमओ
--