फरीदाबाद। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने गौंछी नाले में सीवर का गंदा पानी डालने पर निगम पर 25 लाख का (पर्यावरण क्षतिपूर्ति) जुर्माना लगाया है। बोर्ड का मानना है कि गौंछी नाले में गंदा पानी डालने से यमुना नदी का पानी दूषित हो रहा है। बोर्ड ने नाले के पानी का जांच कराया था। इसमें पानी के नमूने फेल मिले। इसके बाद कार्रवाई की गई है।
गौंछी ड्रेन (नाला) एनआईटी से निकलता है और पलवल में यमुना नदी में जाकर मिलता है। इस दौरान कई गांवों में पानी से सिंचाई भी होती है। एनआईटी, बाटा फ्लाईओवर, जवाहर कॉलोनी, सोहना रोड, गौंछी गांव और प्रतापगढ़ समेत अन्य क्षेत्र पड़ते हैं। प्रदूषण बोर्ड का मानना है कि गौंछी ड्रेन में सीवर का पानी बिना शोधित किए डाला जा रहा है। नाले के आसपास के क्षेत्र से भी सीवर का पानी आ रहा है। इसे लेकर नगर निगम को सीवर लाइन का इंतजाम करना चाहिए था ताकि गंदा पानी सीधे नाले में नहीं आ सके। सीवर में गंदा पानी जाने से यमुना नदी का पानी दूषित होता है। दूसरी ओर एचएसपीसीबी नाले के पानी का नमूना लेकर जांच करता है। जांच रिपोर्ट में पानी के नमूने फेल मिले हैं। प्रदूषण बोर्ड ने सितंबर, अक्तूबर, दिसंबर (2021) और फरवरी व मार्च से 2022 तक प्रति माह पांच लाख के हिसाब से 25 लाख का जुर्माना निगम पर लगाया है। प्रदूषण बोर्ड के अनुसार एनजीटी के एक आदेश में सीवर का पानी शोधित कर ही ड्रेनेज में डाला जाना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर नगर निगम पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति भरने को कहा है।
गौंछी नाले में सीवर का गंदा पानी डाला जा रहा है। इसेे लेकर नगर निगम को उपाय करने को कहा गया था, लेकिन ऐसा हुआ है। पांच माह का 25 लाख का पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाया गया है।
-दिनेश कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड