ऐसे हुआ खुलासा
साल 2020 में जेल में इन कर्मचारियों की नियुक्ति होने के बाद एक शख्स ने परीक्षा में हेरफेरी का आरोप लगाया। मामला के तूल पकड़ने के बाद दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड ने अपने स्तर पर छानबीन शुरू की। नियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड सभी परीक्षार्थियों के डाटा को लेता है और सुरक्षित रखता है।
जांच के दौरान बोर्ड ने भर्ती किए गए सभी 477 अधिकारी व कर्मचारियों के बायोमेट्रिक डाटा को अपने पास मौजूद डाटा से मिलान किया। इसमें 50 कर्मचारियों के डाटा का मिलान नहीं हुआ। इसके बाद पूरा फर्जीवाड़ा का खुलासा हुआ। बोर्ड की ओर से इस बात की जानकारी जेल प्रशासन को दी गई। जेल प्रशासन ने मामले पर कार्रवाई करते हुए सभी कर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया। इन्हें बर्खास्त किए जाने से पहले की प्रक्रिया के तहत 30 नवंबर को इन्हें एक महीना का नोटिस दिया है।
किसी अन्य के परीक्षा देने का है शक
जेल अधिकारी को आशंका है कि जिन लोगों की भर्ती हुई है, उनकी जगह पर किसी अन्य ने परीक्षा दी है। परीक्षा के दौरान कोई अन्य व्यक्ति परीक्षा केंद्र पर बैठा और उनसे असली परीक्षार्थी को परीक्षा उत्तीर्ण कराया। अधिकारियों का मानना है कि इन नियुक्ति में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। इसमें परीक्षा केंद्र के निगरानी अधिकारी से लेकर इससे जुड़े कई लोगों पर शिकंजा कसा जा सकता है।