10 फरवरी 2022 को चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के डी टावर की छठी मंजिल के फ्लैट की छत गिर जाने से दो महिलाओं की मौत हो गई थी। इसके बाद प्रशासन ने जांच समिति गठित की। समिति ने हादसा ग्रस्त डी टावर को रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया और इसे ध्वस्त करने की सिफारिश की। इसके साथ ही दो अन्य टावरों में भी शिकायत आ रही थी। प्रशासन ने टावर ई और टावर एफ को भी रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया और इनके निवासियों को फ्लैट खाली करने के लिए कहा। यहां के निवासी फ्लैट के बदले फ्लैट देने की मांग कर रहे थे। अब बिल्डर ने दो विकल्प दिए हैं। विकल्प देने के साथ ही अब बिल्डर ने विस्थापित खरीदारों को किराया न देने की बात कही है।
ये हैं दो विकल्प
विकल्प नंबर-1 - बिल्डर फ्लैट खरीदारों को 6500 रुपये प्रति स्क्वायर फीट की दर से पैसा वापस करेगा। इसके अलावा बिल्डर वास्तविक स्टांप ड्यूटी पर खर्च की गई रकम भी वापस करेगा।
विकल्प नंबर-2 - बड़ी संख्या में फ्लैट खरीदारों ने ख्वाहिश जाहिर की है कि वह इसी प्रोजेक्ट में रहना चाहते हैं। इस रोशनी में बिल्डर सीएसआईआर- सीबीआरआई की सिफारिशों की जरूरत के अनुसार 36 महीनों में प्रोजेक्ट को फिर से बनाकर या मरम्मत करके देगा। जो भी जरूरी होगा। अगर डी, ई और एफ टावर को फिर से निर्माण की बात आती है तो फ्लैट मालिकों को उसी साइज का दूसरा फ्लैट रहने के लिए दिया जाएगा। इसी के साथ पिछले कुछ वर्षों में भवन निर्माण सामग्री और श्रमिक लागत पर हुई बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए फ्लैट के सुपर एरिया के लिए एक हजार रुपये प्रति स्क्वायर फीट की दर से मूल्य वसूला जाएगा।
प्रशासन संपत्ति की खरीद बिक्री पर लगी रोक हटाए
बिल्डर ने प्रशासन ने गुहार की है कि हादसे के बाद उनकी कंपनी की सभी संपत्तियों की खरीद बिक्री पर रोक लगा दी है। इससे वह गंभीर आर्थिक संकट में आ गए हैं और किसी भी प्रकार की कंपनी की गतिविधि संचालित नहीं कर पा रहे हैं। 25 लाख रुपये प्रति माह किराए का दे रहे हैं। कामन एरिया मेंटेनेंस भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में वह आगे कुछ भी आर्थिक भार वहन नहीं कर पाएंगे। इसलिए जल्द से जल्द डी, ई और एफ टावर उन्हें सौंपी जाएं। इसके साथ ही खरीद बिक्री पर लगी रोक भी हटाई जाए। चिंटेल्स के उपाध्यक्ष जेएन यादव कहते हैं कि हमने जो दो विकल्प दिए हैं, हमें विश्वास है कि सोसाइटी के निवासी इससे संतुष्ट होंगे। हमने दो दरें प्रस्तुत की हैं वह मौजूदा बाजार दरों से भी ज्यादा हैं। हादसे के बाद निवासियों ने जिन अनिश्चितताओं का सामना किया है, उससे हम वाकिफ हैं। हमें विश्वास है कि हम अब सुरक्षित घर देने में सफल होंगे।
हम चाहते हैं कि उपायुक्त फ्लैट खरीदारों की मीटिंग बुलाएं। इनकी भी बात सुनीं जाए। आरडब्ल्यूए की प्राथमिकता है कि घर खरीदारों के हित प्रभावित न हों। इन्होंने कठिन परिश्रम से अर्जित की गई धनराशि से घर खरीदा है। -राकेश हुड्डा, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए चिंटेल्स