आम्रपाली की तर्ज पर यूनिटेक के प्रोजेक्ट्स को पूरा करने की जिम्मेदारी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (एनबीसीसी) को दी जा सकती है। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यूनिटेक के प्रोजेक्ट को पूरा करने का काम एनबीसीसी को दिया जा सकता है।
लिहाजा शीर्ष अदालत ने यूनिटेक के फ्लैट खरीदारों से इस पर सुझाव देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 9 अगस्त को होगी। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि एनबीसीसी यूनिटेक की अधूरी परियोजनाओं को अपने हाथ में ले सकता है।
उन्होंने पीठ के समक्ष एक प्रस्ताव रखा। इसके मुताबिक, एनबीसीसी को एडवांस के तौर पर 50 करोड़ रुपये दिया जाए और निर्माण कार्य पूरा करने के बाद कमीशन के तौर पर मिलने वाली रकम को इसमें समाहित कर लिया जाएगा।
वेणुगोपाल ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का सुझाव दिया, जो निर्माण कार्य की निगरानी करेगी। इसके बाद पीठ ने फ्लैट खरीदारों से सुझाव मांगे।
पिछले दिनों शीर्ष अदालत ने आम्रपाली समूह का रेरा पंजीकरण रद्द कर उसके प्रोजेक्ट को पूरा करने की जिम्मेदारी एनबीसीसी को दी थी। फ्लैट खरीदारों की ओर से पेश हुए वकील एमएल लाहौटी ने कहा कि यूनिटेक के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में 22 हजार फ्लैटों का निर्माण बाकी है। ऐसे एनबीसीसी को गंभीरता से पूरे काम को अंजाम देने की जरूरत है।