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World Elephant Day 2020: कॉर्बेट नेशनल पार्क में बढ़ रहा गजराजों का कुनबा, 1224 पहुंची संख्या

Wed, 12 Aug 2020 12:56 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, जीवन कुमार, रामनगर (नैनीताल)

सार

  • पहले 1035 हाथी थे, अब यह संख्या 1224 हुई
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विश्व हाथी दिवस 2020
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विस्तार
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इस बार कॉर्बेट नेशनल पार्क में हाथियों का कुनबा बढ़कर 1224 पहुंच गया है जबकि वर्ष 2014-15 में इनकी संख्या 1035 रिकॉर्ड हुई थी। हाथियों का कुनबा बढ़ने से कॉर्बेट प्रशासन गदगद है। कॉर्बेट प्रशासन के अनुसार इस बार 189 हाथियों की वृद्धि हुई है।

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इस साल छह 6 से 9 जून के बीच हाथियों की गणना शुरू की गई थी। तब कुल 1224 हाथी देखने को मिले हैं। वर्ष 2015 में कॉर्बेट पार्क में 1030 हाथियों को देखा गया था। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में 1011 और कालागढ़ टाइगर रिजर्व में 213 हाथी चिन्हित हुए थे।

यह भी पढ़े: हाथी का बच्चा ‘सावन’ बनेगा कॉर्बेट नेशनल पार्क का ब्रांड एंबेसडर, फेसबुक पर खुलेगा एकाउंट
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कॉर्बेट नेशनल पार्क में रेंज के अनुसार ढिकाला में 244, सर्पढुली में 195, बिजरानी में 121, ढेला में 65, झिरना में 152, कालागढ़ में 234,  सोना नदी में 24, पाखरो में 31, पलैंन में 56, अदनाला में 54, मैदावन में 22, मन्दाल में 26 हाथी रिकॉर्ड है।

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हाथी संरक्षण को मनाया गया सावन का बर्थ डे

हाथियों को कॉर्बेट पार्क में लाया गया था, जिनमें कंचंभा नाम की हथिनी गर्भवती थी। गर्भवती हथिनी ने दो अगस्त 2018 में कालागढ़ हाथी कैंप में नर हाथी को जन्म दिया था। कॉर्बेट प्रशासन ने पहले उसका नाम शंभू रखा था, लेकिन बाद में विवादों से बचने के लिए उसका नाम सावन रखा गया।

2019 में कॉर्बेट प्रशासन ने उसके पहले जन् दिन के अवसर पर 140 किलो का केक तैयार किया था और धूमधाम से जन्मदिन मनाया था। इस साल उसके लिए 80 किलो का केक बनाया और पार्क प्रशासन ने उसका जन्मदिन धूमधाम से मनाया। सावन को कॉर्बेट का ब्रांड एंबेसडर बनाने की कवायद कॉर्बेट प्रशासन द्वारा चल रही है।

व्यवहार में आया बदलाव
वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण हाथियों के व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिल रहा। समय से बारिश न होने के कारण इनका पलायन भी प्रभावित हुआ है। घटते और कटते जंगल, इंसानी दखल और प्रिय भोजन रोहनी और बांस के पेड़ों का कम होना भी चुनौती है।

पहले गर्मी शुरू होते ही हाथियों का पलायन फतेहपुर-हाथी गलियारा, सीतावनी गलियारे से ढिकाला चौड़ की ओर होता था। पिछले कुछ सालों से चौड़ों का जलना बंद हो गया है, जिसकी वजह से हाथियों का पलायन न के बराबर रह गया है।
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सीटीआर में घट रही तेंदुओं की संख्या

कॉर्बेट नेशनल पार्क में लगातार बाघों की बढ़ती संख्या से तेंदुओं के लिए चुनौती बनती जा रही है। बाघ अपने इलाके में किसी और का रहना पसंद नहीं करते। ऐसे में बाघों द्वारा तेदुंओं को कॉर्बेट पार्क से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।

कॉर्बेट नेशनल पार्क में 234 बाघ हैं तो वहीं उसके लैंडस्केप में 35 बाघ मौजूद हैं जबकि कॉर्बेट पार्क में तेंदुओं की संख्या नहीं है। बाघ और तेंदुए दोनों के स्वभाव में काफी अंतर होता है। सीटीआर निदेशक राहुल ने बताया कि तेंदुआ आबादी के पास रहना पसंद करते हैं। ऐसे में बाघों की संख्या बढ़ने के कारण तेंदुआ उस एरिया को छोड़ देता है। बावजूद इसके ढिकाला आदि क्षेत्रों में तेंदुए दिखाई देते रहे हैं

कॉर्बेट में हाथियों का कुनबा बढ़ रहा है। हाथियों की संख्या में बढ़ोत्तरी से साफ है कि कॉर्बेट में हाथियों को उनका मनचाहा भोजन मिल रहा है। हाथियों के लिए कॉर्बेट की ओर से बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है।
-राहुल, सीटीआर निदेशक
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