प्रदेश के सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में पहले चरण की काउंसिलिंग के बाद एमबीबीएस की 155 सीटें खाली रह गई हैं। वहीं, दो डेंटल कॉलेजों में बीडीएस की 130 सीटें भी अभी खाली हैं। इनके लिए दूसरे चरण की काउंसिलिंग जल्द आयोजित होगी।
प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की कुल 725 और दो डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस की 200 सीटें हैं। चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने छह से 13 नवंबर के बीच पहले चरण की नीट यूजी काउंसलिंग की, जिसमें एडमिशन के लिए 18 नवंबर आखिरी तिथि तय की गई। एमबीबीएस की खाली सीटों में स्टेट कोटा की 87 और ऑल इंडिया मैनेजमेंट कोटा की 68 सीटें हैं। वहीं, बीडीएस में स्टेट कोटा की 67 और ऑल इंडिया मैनेजमेंट कोटा की 63 सीटें हैं।
मेडिकल विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डा. विजय जुयाल ने बताया कि राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में स्टेट कोटा की 14 अनारक्षित व दो एससी, श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में नौ अनारक्षित, दून मेडिकल कॉलेज में सात अनारक्षित, चार एससी, दो एसटी एसजीआरआर में 12 अनारक्षित, 9 एससी, एक ओबीसी, दो एसटी, जौलीग्रांट मेडिकल कॉलेज में 14 अनारक्षित, छह एससी, एक ओबीसी, तीन एसटी की सीटें खाली हैं।
मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, श्रीनगर और दून में एक-एक सीट आतंकवाद पीड़ितों के आरक्षितों और कश्मीरी माइग्रेंट के लिए आरक्षित हैं। इसके अलावा सीमा डेंटल कॉलेज में बीडीएस की 18 अनारक्षित, नौ एससी, चार ओबीसी व दो एसटी और उत्तरांचल डेंटल कॉलेज में 20 अनारक्षित, नौ एससी, पांच ओबीसी सीटें खाली हैं।