पार्टी आलाकमान ने खेमों के बीच संतुलन साधने के अलावा क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को भी साधने की कोशिश की। पूर्व विधायक गणेश गोदियाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर जहां हरीश रावत खुश किया गया तो वहीं कुमाऊं से भुवन कापड़ी और तिलक राज बेहड़ को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर कांग्रेस अध्यक्ष पद से विदा हुए प्रीतम सिंह को संतुष्ट करने की कोशिश की गई।
गढ़वाल से पूर्व विधायक प्रो. जीत राम को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया तो वहीं रंजीत रावत को भी यह अहम जिम्मेदारी मिली। कभी हरीश रावत के कट्टर समर्थक माने जाने वाले रंजीत रावत अब प्रीतम सिंह के ज्यादा करीबी हैं। उनकी ताजपोशी में प्रीतम खेमे का बड़ा हाथ माना जा रहा है। तकरीबन हर बड़े चेहरे को पार्टी ने किसी न किसी समिति में अहम जिम्मेदारी दी। मिसाल के तौर पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कांग्रेस समन्वय समिति की कमान सौंपी गई। इसी तरह नव प्रभात,प्रदीप टम्टा, नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश के बेटे सुमित हृदयेश को भी महत्व दिया गया। हरीश रावत खेमे के प्रदीप टम्टा तकरीबन सभी प्रमुख समितियों में शामिल हैं।
चुनाव प्रचार समिति में हरीश खेमे का दबदबा
चुनाव प्रचार समिति की कमान पार्टी ने दिग्गज हरीश रावत को सौंपी। इस समिति में हरीश रावत के वफादार प्रदीप टम्टा को उपाध्यक्ष बनाया गया जबकि हरीश रावत कैंप में ही रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल संयोजक बनाए गए।