कोटद्वार में छात्र जीवन के दौरान बिताए दिनों को याद करते हुए यूपी के सीएम योगी बोले कि देवभूमि पर उत्तराखंड के लोगों ही नहीं उनका भी अधिकार है। कहा कि वर्ष 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कोटद्वार के झंडाचौक में सभाएं होती थीं, तब मैं कोटद्वार में पढ़ाई करता था और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी सभाओं में भाग लेता था, लेकिन उस वक्त लाठी डंडों के बीच सपने में भी नहीं सोचा था कि वह यूपी के मुख्यमंत्री बनेंगे और राम मंदिर का शुभारंभ का उन्हें अवसर मिलेगा।
भीड़ नियंत्रण करने में सुरक्षा कर्मियों के छूटे पसीने
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सुबह ही एनएच पर झंडाचौक और तहसील चौराहे तक बैरिकेडिंग कर दी गई थी। हेलीपैड से मंच तक पहुंचने के रास्ते पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही। मंच पर पैरा कमांडों, डॉग स्क्वायड और इंटेलीजेंस के लोग मौजूद थे। आसपास के घरों की छतों पर भी पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था। जबकि भीड़ को देखते हुए तहसील चौराहे तक सड़क के दोनों और बीएसएफ और पुलिस की तैनाती की गई थी। योगी आदित्यनाथ के पहुंचते ही मंच और तहसील चौराहे के बीच एनएच पर इतनी अधिक भीड़ हो गई कि पुलिस फोर्स को लोगों को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।
सिद्धबाबा के किए दर्शन
। ग्रास्टनगंज स्थित हेलीपैड से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे पहले सिद्धबली मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने सिद्धबाबा के दर्शन कर पूजा की। सिद्धबली मंदिर के पुजारी केके दुदपुड़ी ने पूजा के बाद मुख्यमंत्री योगी को प्रसाद भेंट किया। इसके बाद वह मंदिर के कार्यालय पहुंचे और यहां मंदिर समिति के अध्यक्ष कुंज बिहारी देवरानी ने उनकी अगवानी की। करीब 20 मिनट मंदिर में रुकने के बाद युवा मोर्चा के कार्यकर्ता बाइक रैली के साथ उनके काफिले को मालवीय उद्यान चुनावी सभा तक लाए। इस मौके पर मंडी समिति के अध्यक्ष सुमन कोटनाला, उमेश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे। सिद्धबली मंदिर में योगी की कोटद्वार निवासी बहिन कौशल्या देवी और जीजा ओमप्रकाश रावत व छोटे भाई महेंद्र सिंह बिष्ट ने उनसे संक्षिप्त मुलाकात की।