अगस्त्यमुनि ब्लॉक के ढौंढिक क्यूड़ी गांव निवासी भरत सिंह नेगी व शारदा नेगी की तीन संतानों में तीसरे अंशुल नेगी ने बताया कि उसने जो स्कूल में पढ़ाई की उसका घर में रिवीजन किया। बताया कि पढ़ने का कोई तय समय नहीं होता, जब मन करे तब पढ़ें और पूरे मनोयोग से पढ़ें, उसी से सफलता मिलना तय है। मेरा लक्ष्य सिर्फ पढ़ना था। कहा कि मेरी सफलता में मेरे विद्यालय, शिक्षक, माता-पिता और दोनों बहनों की अहम भूमिका है। अंशुल ने 500 में 485 अंक प्राप्त किए हैं।
गूगल से ज्यादा किताबों पर जताया भरोसा
अंशुल और अंशिका के पास मोबाइल नहीं है। पूरे शिक्षण सत्र में दोनों मेधावियों ने मोबाइल से दूरी बनाई। वहीं अपनी पढ़ाई के लिए भी इंटरनेट पर गूगल पर जानकारी जुटाने की बजाय किताबों का सहारा लिया। कभी कभार ही दोनाें ने अपनी बड़ी बहन खुशी के मोबाइल पर यूट्यूब पर विज्ञान और गणित से जुड़े टाॅपिक्स की जानकारी ली। खुशी बीएससी कर रही हैं, उन्होंने भी इंटरमीडिएट में 97 फीसदी अंक प्राप्त किए थे। अंशुल के पिता भरत सिंह नेगी जीआईसी कमसाल में लिपिक हैं। जबकि माता शारदा देवी एक निजी विद्यालय में पढ़ाती हैं।