साबिर पाक के सालाना उर्स में पिरान कलियर आने वाले जायरीनों को प्रशासन ने छूट दी है। बाहर से आने वाले जायरीनों के लिए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और आरटीपीसीआर रिपोर्ट जरूरी है। वहीं सूफी संतों को दिया जाने वाला पारंपरिक लंगर बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
साबिर पाक के सालाना उर्स में देशभर से जायरीन कलियर पहुंचते हैं। शासन ने इस बार भी कोविड की गाइडलाइन के अनुसार उर्स कराए जाने की अनुमति दी थी। उर्स में रोजाना केवल 800 जायरीनों को दरगाह में जियारत के लिए अनुमति दी गई थी। हाईकोर्ट से चारधाम यात्रियों की संख्या सीमित करने वाली बाध्यता खत्म होने पर हरिद्वार जिला प्रशासन ने कलियर के सालाना उर्स में भी जायरीनों की संख्या से पाबंदी हटा दी है। जिलाधिकारी विनय शंकर पांडेय ने पिरान कलियर उर्स को लेकर भी गाइडलाइन में तब्दीली की है।
उर्स 2021: मेहंदी डोरी की रस्म के साथ साबिर पार्क के सालाना उर्स का आगाज, ये होंगी प्रमुख रस्में
डीएम के अनुसार अब कितने भी लोग दूसरे राज्यों से उर्स में शामिल हो सकते हैं। जायरीनों के पास सिटीजन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और आरटीपीसीआर की रिपोर्ट होनी चाहिए। वहीं सूफी संतों और जायरीनों को दिए जाने वाले लंगर को बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। उर्स के दौरान जायरीनों और सूफी संतों की संख्या बढ़ने पर दरगाह का पारंपरिक लंगर तीन गुना तक बढ़ा दिया जाता है, लेकिन इस बार गाइडलाइन में लंगर को आम दिनों के बराबर संचालित करने के निर्देश दिए गए थे। इससे उर्स में आने वाले हजारों जायरीन को लंगर से महरूम रहना पड़ सकता है।
होटलों को नहीं मिली अनुमति, जायरीनों को होगी दिक्कत
साबिर पाक के सालाना उर्स की मुख्य रस्मों में शामिल होने के लिए लाखों की संख्या में जायरीन कलियर पहुंचेंगे। जायरीनों के लिए खाने के लिए कोई बड़े होटल नहीं होने के कारण उनको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। अभी तक प्रशासन ने होटल की अनुमति नहीं दी है। पिरान कलियर में सात अक्तूबर को मेहंदी डोरी की रस्म के साथ सालाना उर्स का आगाज हो गया था। साबिर पाक के सालाना उर्स में सूफियों और संतों का आना शुरू हो गया है।
सूफी लोग अलग-अलग जगहों पर अपनी गद्दियां और आशियाने लगाते हैं। 18 अक्तूबर को छोटी रोशनी से जायरीनों का आना शुरू हो जाएगा। उर्स की रस्मों के अलावा कलियर में एक मेले का आयोजन भी होता है, लेकिन इस बार मेले पर पाबंदी है। बाहर से आने वालों के लिए होटल और दुकान लगाने की अनुमति नहीं है। खाने के होटल नहीं होने के कारण इस बार जायरीनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।