अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद दरअसल साधुओं की वो संस्था है, जिसमें अलग-अलग संप्रदाय के साधुओं के अखाड़ों का समन्वय है।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की स्थापना आज से 67 साल पहले 1954 में की गई थी। जिसका उद्देश्य अखाड़ों के बीच में आपसी तालमेल रखने के साथ-साथ कुंभ और महाकुंभ जैसे आयोजनों को सुचारू रूप से संपन्न करवाने में अपनी भूमिका निभाना भी था।
मठों को बाद में कहा जाने लगा अखाड़ा
दरअसल, सनातन धर्म में ये मान्यता है कि आदि गुरू शंकराचार्य ने देश के चारों कोनों में धर्म की स्थापना के लिए मठ स्थापित किये थे। बदरीनाथ, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी और द्वारिका पीठ के इन्हीं मठों को अखाड़ा कहा जाने लगा। शंकराचार्य का सुझाव था कि मठ, मंदिरों और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर शक्ति संचय भी होना चाहिए।
तभी से मठों में साधु तपस्या करने के साथ-साथ शारीरिक सौष्ठव पर भी ध्यान देने लगे। जानकारी के मुताबिक फिलहाल भारत कुल 13 अखाड़े हैं। ये अखाड़े हिंदू धर्म से जुड़े रीति-रिवाजों के तहत चलते हैं और त्योहारों का आयोजन करते हैं। कुंभ और अर्धकुंभ के आयोजन में ये अखाड़े बढ़-चढ़ कर भाग लेते हैं।