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उत्तराखंड में रेल रोको आंदोलन: लंढौरा रेलवे ट्रैक पर चार घंटे किसानों का कब्जा, 30 ट्रेनें प्रभावित

Mon, 18 Oct 2021 11:40 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal संवाद न्यूज एजेंसी, लंढौरा (रुड़की)

सार

Kisan Rail Roko Andolan: सोमवार को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी, कार्यकर्ता करीब 12 बजे लंढौरा रेलवे स्टेशन पर पहुंचे और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद किसान रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर बैठ गए।
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रुद्रपुर में किसान रेलवे ट्रेक पर पहुंचे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखीमपुर की घटना और कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर स्थानीय किसान संगठनों ने लंढौरा रेलवे स्टेशन पर रेल का चक्का जाम करते हुए प्रदर्शन किया। साथ ही केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों के रेल चक्का जाम करने से करीब 30 ट्रेनें और मालगाड़ी प्रभावित हुई। किसान करीब चार घंटे तक ट्रैक पर डटे रहे। बाद में मांगों को लेकर एएसडीएम को ज्ञापन सौंपकर चक्का जाम समाप्त कर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।

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भाकियू (टिकैत) के जिलाध्यक्ष विजय शास्त्री ने कहा कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा ने लखीमपुर खीरी में जिस तरह किसानों पर गाड़ियां चढ़ाई हैं, उसे किसी भी सूरत में बरदाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा सरकार उसे बचाने का कार्य कर रही है। इससे साफ जाहिर है कि केंद्र की भाजपा सरकार किसान विरोधी है। जब तक मंत्री और उनके पुत्र की गिरफ्तारी नहीं होती, किसान इसी तरह आंदोलन करता रहेगा। सरकार कोरोना काल में गुपचुप तरीके से किसान विरोधी तीन कानून लाई। इसके विरोध में एक साल से देश का किसान दिल्ली की सड़कों पर हैं, लेकिन केंद्र सरकार हर वक्त किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की साजिश रच रही है। भाजपा को इसका परिणाम चुनाव में भुगतना होगा।

यह भी पढ़ें... लखीमपुर खीरी केस: 20 अक्तूबर को नारसन बॉर्डर से निकलेगी शहीद किसानों की अस्थि कलश यात्रा
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इस दौरान करीब चार घंटे तक किसान रेलवे ट्रैक पर कब्जा जमाए रहे। इसके चलते ट्रैक से गुजरने वाली करीब 30 ट्रेनें और मालगाड़ी प्रभावित रही। शाम करीब चार बजे किसानों ने राष्ट्रपति के नाम से एक ज्ञापन एएसडीएम विजय नाथ शुक्ला को सौंपा। इस मौके पर मंडल अध्यक्ष संजय चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष रामपाल सिंह, राव तजम्मुल, प्रदेश महासचिव रवि कुमार, हरेंद्र सिंह, कुलदीप सैनी, योगेंद्र राठी, सरबजीत सिंह, मोहम्मद इकबाल, चमन लाल शर्मा, रमनजीत सिंह, प्रीतपाल सिंह, तखवंत सिंह, अमरेंद्र सिंह, मोहम्मद अरशद, मोहम्मद अजीम, सुब्बा सिंह मौजूद रहे। इस दौरान रेलवे स्टेशन पर पुलिस का भी कड़ा पहरा रहा। जीआरपी उपाधीक्षक मनोज कत्याल ने बताया कि किसान आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से रहा। रेल रोको आंदोलन को देखते हुए रेलवे विभाग ने हरिद्वार और सहारनपुर की ओर जाने वाली गाड़ियों को रद्द कर दिया था। इस दौरान सीओ मंगलौर पंकज गैरोला, आरपीएफ प्रभारी सोनी शर्मा, लंढौरा चौकी प्रभारी उमेश लोधी आदि भी मौजूद रहे।

ये ट्रेनें रहीं प्रभावित
अहमदाबाद मेल, शताब्दी देहरादून, गंगानगर, कोलकाता-अमृतसर, देहरादून-बांद्रा, हरिद्वार-गंगानगर, हरिद्वार-अमृतसर जन शताब्दी, उज्जैन-इंदौर, डीएलएसए पैसेंजर, लखनऊ-चंडीगढ़, जयनगर-अमृतसर, रामनगर-चंडीगढ़ समेत 18 ट्रेनें।

देहरादून-सहारनपुर पैसेंजर लक्सर में रद्द 
लक्सर। किसानों के रेल रोको आंदोलन के चलते देहरादून से सहारनपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन को लक्सर रेलवे स्टेशन पर रद्द करना पड़ा। ट्रेन को लक्सर से ही देहरादून रवाना किया गया। वहीं, मुरादाबाद जाने वाली मालगाड़ी को ढंडेरा रेलवे स्टेशन पर रोका गया। रामनगर से चंडीगढ़ जाने वाली चंडीगढ़ एक्सप्रेस को लक्सर में करीब एक घंटे रोका गया। प्रयागराज से चलकर हरिद्वार जाने वाली प्रयागनगर एक्सप्रेस तीन घंटे की देरी से लक्सर पहुंची। पाटलिपुत्र से चंडीगढ़ जाने वाली चंडीगढ़ एक्सप्रेस भी घंटों की देरी से पहुंची। लखनऊ-चंडीगढ़ स्पेशल को भी बिजनौर मौअज्जमपुर नारायण रेलवे स्टेशन पर रोका गया। वाणिज्य निरीक्षक अजय तोमर ने बताया कि लंढौरा रेलवे स्टेशन पर किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए ट्रेनों को स्टेशन पर रोका गया था। धरना समाप्त होने के बाद ट्रेनों का संचालन बहाल कर दिया गया। 

काशीपुर में ट्रेक पर बैठे किसान
वहीं काशीपुर में झमाझम बारिश के बीच किसानों ट्रेन रोकी और ट्रेक पर बैठ गए। उक्त ट्रेन दोपहर 12:10 बजे बरेली को रवाना होनी थी। देहरादून के डोईवाला में किसान मोर्चा की ओर से रेलवे स्टेशन पर नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया गया। स्टेशन परिसर में धरना देकर सरकार की किसान विरोधी नीतियों की आलोचना की गई। इस दौरान कहा गया कि भाजपा सरकार किसानों की समस्याओं के निदान के प्रति संवेदनशील नहीं है।
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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री को अभी तक बर्खास्त नहीं किया गया है। जिससे किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रदर्शन में किसानों ने रेल पटरी पर पहुंचकर रेल रोकने का प्रयास किया, लेकिन जीआरपी और स्थानीय पुलिसकर्मियों ने किसानों को रोक दिया।

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