हरिद्वार का सप्तसरोवर क्षेत्र बसाने वाले आदि सप्तऋषियों ने तो अति प्राचीनकाल में यहां योग साधना का प्रतिपादन ज्ञान साधना के साथ किया। उन ऋषियों में भारद्वाज, जमदग्नि, गौतम, अत्रि, वशिष्ठ आदि प्रमुख हैं।
इन ऋषियों ने तो योग साधना को आत्मा के प्रकाश का मुख्य माध्यम माना था। प्राण शक्ति को योग के साथ जोड़कर ऋषियों ने हरिद्वार की इसी प्राचीन भूमि पर अनेक प्रयोग किए।
ऐसा ही काम बाद में कनखल संन्यास मार्ग स्थित अनेक आश्रमों में हुआ। एक जमाने में कनखल नगरी आयुर्वेद का बहुत बड़ा केंद्र थी। यहां योग और आयुर्वेद के योग से बहुत बड़े काम हुए। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर इस नगरी में अनेक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।