सोशल मीडिया हिंदी के लिए बहुत सकारात्मक पहलू बन गया है। हिंदी के प्रति नई पीढ़ी में रुझान बढ़ा है। फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर पर युवाओं की हिंदी में लिखी गई अभिव्यक्ति और टिप्पणियों को पढ़कर मन में बड़ी प्रसन्नता होती है। सोशल मीडिया पर जो स्वदेशी भाषा में प्रचार प्रसार हो रहा है उससे हिंदी को संबल मिला है। अंग्रेजी अंतरराष्ट्रीय भाषा है। लेकिन हिंदी हमारे अस्तित्व की पहचान है। सरकार की अनुकूलता के चलते सोशल मीडिया पर को हिंदी बढ़ावा मिल रहा है। एक बार फिर हिंदी का स्वर्णिम दौर वापस लौट रहा है।
- बंशीधर पोखरियाल, वरिष्ठ साहित्यकार
हिन्दी हैं हम: उत्तराखंड में हिन्दी को बुलंद कर रहे दक्षिण के अफसर, कामकाज में भी दे रहे तवज्जो
कोरोना काल में और लॉकडाउन के दौरान लोग अधिकांश अपने घरों में ही रहे। ऐसे में सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म के लोगों की सक्रियता बढ़ती। जब संक्रमण काल के चलते जब चारों तरफ निराश थी, इसी दौरान सोशल मीडिया पर हिंदी के प्रचार और प्रचार बड़े पैमाने पर बढ़ा। डिजिटल क्रांति में हिंदी के आगाज के समय साहित्यकारों और कवियों में भी एकजुटता दिखी। सोशल मीडिया से हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी पहचान मिली।
- प्रबोध उनियाल, साहित्यकार
हिंदी हैं हम: रशिया की नताल्या की कहानी, मातृभाषा थी तो रूसी पर अब है बोली हिंदुस्तानी
हिंदी के प्रति देश में चेतना पैदा हो रही है। सोशल मीडिया का इसमें बड़ा योगदान है। नई पीढ़ी सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय रहती है। ऐसे में अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम की मनोवृति उनका हिंदी के प्रयोग को लेकर रुझान बढ़ा है। पहले अखबारों, समाचार चैनलों, रेडियो और टीवी ने हिंदी के प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब सोशल मीडिया भी यही काम कर रहा है। हालांकि सोशल मीडिया पर वर्तनी की अशुद्धियों को लेकर सुधार की जरूरत है।
-देवेंद्र सकलानी, साहित्यकार
हिंदी हैं हम: 70 साल से इंजीनियरिंग का विश्व प्रसिद्ध संस्थान कर रहा हिंदी का उत्थान
अंग्रेजी में लिखने के शब्दों के चयन में काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। हिंदी तो हमारी अपनी बोलचाल की भाषा है ऐसे में फेसबुक, व्हाटस्एप और ट्विटर पर लिखने में आसानी होती है। कई आसान हिंदी कीपैड भी प्ले स्टोर पर उपलब्ध हो जाते हैं। हिंदी में घंटों बातचीत कर सकते हैं। सोशल मीडिया पर उपलब्ध हिंदी कहानियों, कविताओं और मिम्स को पढ़ने में बड़ा मजा आता है। इनकों शेयर भी करती हूं।
-पिंकी सिंह, ग्रहणी
फेसबुक, व्हाटसएप और वीडियो शेयरिंग एप से कई विदेश के दोस्तों से भी बात होती है। जब हिंदी में कोई पोस्ट लिखती हूं तो वे ट्रांस्लेटर से उसका मतलब पता करते हैं। कई बार वे अपनी हिंदी में भी मेरी पोस्ट टिप्पणी लिखते हैं। बड़ा अच्छा लगता है कि विदेश के लोग भी हमारी भाषा के प्रति जागरुक हो रहे हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है। हिंदी में लिखना और पढ़ना दोनों आसान है। कई कीपैड एप हैं। जिसमेें हम बोलकर भी हिंदी लिख सकते हैं।
-निवेदिता अग्रवाल, शिक्षिका