प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में पढ़ाई चल रही है। इस दौरान छात्र-छात्राओं को कोविड गाइड लाइन का पालन करना होगा, वैक्सीनेशन को लेकर कोई शर्त नहीं है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मुताबिक अधिकतर छात्र-छात्राएं एवं स्टाफ का वैक्सीनेशन हो चुका है, यदि कोई छात्र छूट गया तो उसे महाविद्यालय आने से नहीं रोका जाएगा।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के महाविद्यालयों में एसओपी का पूरी तरह से पालन किया जाएगा, लेकिन ऐसी कोई शर्त नहीं है कि यदि किसी छात्र को दोनों डोज न लगी हो तो उसे महाविद्यालय परिसर में नहीं आने दिया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशक पीके पाठक के मुताबिक शासन की ओर से 19 अगस्त को महाविद्यालय खोले जाने को लेकर एसओपी जारी की गई थी। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि महाविद्यालय खोले जाने से पहले उन्हें सैनिटाइज किया जाएगा। यह प्रक्रिया रोज होगी। मुख्य द्वार पर सैनिटाइज, हैंडवॉश, थर्मल स्कैनिंग और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था होगी। सभी छात्र-छात्राओं एवं स्टाफ के लिए मास्क जरूरी किया गया है।
महाविद्यालय में सामाजिक दूरी का पालन करना होगा। कर्मचारी, छात्र-छात्राओं को खांसी, जुकाम, बुखार होने पर प्राथमिक उपचार देकर घर भेज दिया जाएगा। शासन की ओर से राज्य के समस्त विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, निजी विश्वविद्यालय के कुलपति, समस्त जिलाधिकारियों एवं उच्च शिक्षा निदेशक को इस संबंध में आदेश जारी किए गए। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तराखंड के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. प्रशांत सिंह के मुताबिक महाविद्यालय खुलने के दौरान शासन एवं उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कोविड गाइडलाइन को लेकर कोई नया आदेश जानी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इससे विभाग की उदासीनता का पता चलता है।
बिना वैक्सीनेशन वाले छात्रों को रोकने का कोई शासनादेश नहीं
बिना वैक्सीनेशन के छात्रों को महाविद्यालय में आने से रोकने का कोई शासनादेश नहीं है। शासन ने 19 अगस्त 2021 के आदेश में समस्त शैक्षणिक, गैर शैक्षणिक कार्मिकों का टीकाकरण करा लिए जाने का आदेश दिया है, लेकिन इस आदेश में कहीं यह नहीं लिखा है कि बिना वैक्सीनेशन वाले छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इसके अलावा यूजीसी की 12 अप्रैल 2021 की गाइडलाइन में मास्क लगाने, हाथ धोने, टीका लगवाएं, सामाजिक दूरी बनाए आदि के संबंध में कहा गया है, लेकिन बिना वैक्सीनेशन के छात्र-छात्राओं को महाविद्यालय में आने से रोकने का कोई आदेश नहीं है।