चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) को यूटी प्रशासन ने बड़ा झटका दिया है। प्रशासन ने बोर्ड की व्यावसायिक संपत्तियों को फ्री होल्ड करने से इनकार कर दिया है। लीज होल्ड होने की वजह से बोर्ड की व्यावसायिक संपत्तियां कई बार दाम करने के बावजूद नहीं बिक रही हैं।
हाउसिंग बोर्ड को उम्मीद थी कि नई नीलामी में व्यावसायिक संपत्तियों को फ्री होल्ड पर बेचने की उन्हें मंजूरी मिल जाएगी जिससे कि पिछले कई सालों से नहीं बिकी संपत्तियों को खरीदार मिलेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। प्रशासन ने यह कहते हुए मंजूरी देने से इनकार कर दिया है कि ऐसा करने के लिए कोई नीति नहीं है। हालांकि प्रशासन आवासीय संपत्तियों की नीलामी फ्री होल्ड के आधार पर ही कर रहा है। व्यावसायिक संपत्तियों के लिए प्रशासन ने बोर्ड को जमीन दी है, जिसपर व्यावसायिक संपत्तियों का निर्माण किया गया है। इसलिए बोर्ड ने प्रशासन ने आग्रह किया था वह उन्हें फ्री होल्ड पर बेचने की अनुमति दें। लीज होल्ड होने की वजह से 100 से ज्यादा संपत्तियां पिछले कई वर्षों से बिकी नहीं हैं। बोर्ड उनके दामों को तीन बार 10-10 फीसदी कम कर चुका है, बावजूद इसके लोग उन संपत्तियों में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
एस्टेट ऑफिस फ्री होल्ड पर करता है सभी संपत्तियों की नीलामी
यूटी प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने फरवरी 2022 में लीज होल्ड नीति में बदलाव करने की मंजूरी दे दी थी। इसके बाद से एस्टेट ऑफिस अपनी सभी संपत्तियों की नीलामी फ्री होल्ड के आधार पर ही कर रही है। लीज होल्ड होने का नुकसान प्रशासन को पिछले काफी समय से उठाना पड़ रहा था, क्योंकि लीज होल्ड होने की वजह से लोग इनमें रुचि नही दिखाते और सालों-साल प्रशासन की व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियां बिक नहीं पाती थी। शहर के कई इलाकों में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, नगर निगम और एस्टेट ऑफिस की संपत्तियां हैं जो खाली पड़ी हैं और उन्हें कोई खरीदार नहीं मिला है। इसमें कई सेक्टरों में बने बूथ भी हैं। इसके बाद ही हाउसिंग बोर्ड ने प्रशासन ने मंजूरी मांगी थी ताकि वह भी व्यावसायिक संपत्तियों की नीलामी फ्री होल्ड के आधार पर कर सकें, लेकिन प्रशासन ने इन्कार कर दिया है।
इंडस्ट्रियल प्लॉट को फ्री होल्ड करने के लिए केंद्र को भी भेजा प्रस्ताव
चंडीगढ़ प्रशासन ने आवंटित इंडस्ट्रियल प्लॉट को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। हालांकि काफी समय से इस पर कोई फैसला नहीं लिया गया है। इसलिए प्रशासन ने नई संपत्तियों की नीलामी के लिए नीति में बदलाव कर दिया है। इसके पीछे कई कारण हैं। इज ऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर केंद्र सरकार जितनी बार रैंकिंग जारी करता है, उसमें चंडीगढ़ पीछे ही रहा है। लीज होल्ड से फ्री होल्ड कन्वर्जन को मंजूरी मिलने के बाद एक तरफ इज ऑफ डूइंग बिजनेस को प्रोत्साहन मिलेगा। बता दें कि चंडीगढ़ में करीब 80 फीसदी व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्ति लीज पर है।