पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पाकिस्तानी महिला मित्र आरूसा आलम को लेकर कैप्टन और उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के बीच छिड़ी रार ने ट्विटर युद्ध का रूप ले लिया है। शुक्रवार से ही दोनों नेताओं की ओर से अपने-अपने ट्वीटर हैंडल का इस्तेमाल करते हुए आरोप-प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं।
आरूसा को वीजा किसने दिलाया? कैप्टन ने बरगाड़ी मामले को हल क्यों नहीं किया जैसे रंधावा द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में कैप्टन ने चार और ट्वीट दागते हुए कहा है कि उन्होंने ही आरुसा का 16 साल तक वीजा प्रायोजित किया है। हालांकि उन्होंने यह लिखा कि भारत सरकार द्वारा वीजा जारी करने की जो प्रक्रिया है, उसे हर बार अपनाया गया था। इसके साथ ही कैप्टन ने रंधावा को श्री गुरु ग्रंथ साहिब की शपथ लेने की चुनौती दी कि बरगाड़ी कांड की जांच के लिए गठित एसआईटी में आईजी कुंवर विजय प्रताप और रणबीर सिंह खटड़ा की नियुक्ति रंधावा की सिफारिश पर ही की गई थी।
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चार ट्वीट कर रखी अपनी बात
इस जवाबी हमले वाले अपने पहले ट्वीट में कैप्टन ने रंधावा को क्षुब्ध करार देते हुए लिखा- क्षुब्ध? इतने सालों में क्या आपने कभी मुझे किसी मुद्दे पर परेशान होते देखा है? वास्तव में, यदि आपके फ्लिप फ्लॉप कोई संकेत हैं, तो आप परेशान और भ्रमित प्रतीत होते हैं। आप आरूसा आलम के खिलाफ इस तथाकथित जांच के लिए अपना मन पक्का क्यों नहीं कर रहे?
कैप्टन ने दूसरे ट्वीट में दावा किया- जहां तक आरूसा का वीजा प्रायोजित करने का सवाल है, तो मैंने 16 साल तक किया। और आपकी जानकारी के लिए, ऐसे वीजा के लिए अनुरोध भारतीय उच्चायोग द्वारा विदेश मंत्रालय को भेजे जाते हैं, जिन्हें अनुमोदन से पहले रॉ और आईबी द्वारा जांच करके उन्हें मंजूरी दी जाती है। और इस मामले में हर बार ऐसा ही हुआ है।
कैप्टन ने तीसरे ट्वीट में लिखा- और क्या है, 2007 में जब मैं मुख्यमंत्री नहीं था, तत्कालीन यूपीए प्रधानमंत्री द्वारा आरूसा आलम को वीजा देने से पहले एनएसए को जांच का आदेश दिया गया था। आप अब भी इस पर पंजाब के संसाधनों को बर्बाद करना चाहते हैं? आपको जो कुछ भी चाहिए, मैं आपकी मदद करूंगा।
चौथे ट्वीट में कैप्टन ने लिखा- बरगाड़ी जांच के मामले में मैं आपको श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की शपथ लेने या सीधे मुकर जाने की चुनौती देता हूं कि दोनों जांच अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह और रणबीर एस. खटड़ा आपकी सिफारिशों पर ही नियुक्त किए गए थे। मुझ पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय अपना काम करो।