हरियाणा रीजनल ट्रांसपोर्ट अथारिटी (आरटीए) के अधिकारियों को हरियाणा राज्य परिवहन और राज्य परिवहन के अधिकारियों को आरटीए भेजने के फैसले को रद्द करने वाले आदेश को हरियाणा सरकार ने अब खंडपीठ में चुनौती दी है। सिंगल बेंच से राहत पाने वाले अधिकारियों ने भी आदेश का पालन करवाने के लिए इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल कर दी है।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के समक्ष याचिका दाखिल करते हुए आरटीए कर्मियों की ओर से हरियाणा सरकार के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें हरियाणा सरकार ने आरटीए के अधिकारियों को हरियाणा राज्य परिवहन और परिवहन अधिकारियों को आरटीए में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का निर्णय लिया था। सिंगल बेंच ने 10 फरवरी को अधिकारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि अधिकारियों की रजामंदी के बगैर व दूसरे विभाग में समान पद न होने की स्थिति में इस प्रकार की प्रतिनियुक्ति ठीक नहीं है।
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के निर्णय को गलत मानते हुए इस प्रतिनियुक्ति के आदेश को खारिज कर दिया था। इसी फैसले को हरियाणा सरकार ने खंडपीठ में चुनौती दे दी है। खंडपीठ के समक्ष इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए हरियाणा सरकार ने समय देने की अपील की। इसे मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई 26 अक्तूबर को तय की है। इसके साथ ही अधिकारियों की ओर से भी अवमानना याचिका दाखिल की है, जिसमें कहा गया है कि सिंगल बेंच के आदेश के बावजूद जानबूझ कर सरकार प्रतिनियुक्ति का आदेश वापिस नहीं ले रही है। ऐसे में दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।