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Haryana: पिछले साल के मुकाबले इस बार तीन गुना कम जली पराली, जागरूकता अभियान का दिखने लगा असर

Sun, 09 Oct 2022 11:35 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हरसेक की रिपोर्ट के अनुसार कुल 80 केसों में सबसे अधिक मामले कुरुक्षेत्र 25 और करनाल में 25 आए हैं। इसके अलावा अंबाला 10, जींद 8, कैथल 8, फतेहाबाद 3, पानीपत-सोनीपत 2-2, पलपल और यमुनानगर में 1-1 स्थान पर पराली जलाई गई है। 
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पराली की समस्या। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के लिए हर साल जिम्मेदार ठहराए जाने वाले किसानों में अब बदलाव हो रहा है। ये जागरूकता का असर ही है कि इस बार हरियाणा में खेतों में पराली जलाने के मामले कम सामने आ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले अब तक तीन गुना कम केस सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार पिछले साल इस समय तक 250 से अधिक स्थानों पर पराली जलाई गई थी लेकिन इस साल प्रदेश में कुल 80 स्थानों पर ही पराली जलने की रिपोर्ट आई है। कृषि विभाग के अधिकारी इसे सकारात्मक संकेत बता रहे हैं। 

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गौरतलब है कि वर्ष 2020 में हरियाणा में 15 सितंबर से 12 अक्तूबर तक 1213 स्थानों पर पराली जलाई गई थी। 2021 में इसी अवधि में 298 मामले रिपोर्ट किए गए। इस साल केवल 80 स्थानों पर ही जलाई गई है। हरियाणा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (हरसेक) द्वारा पराली जलाने वालों पर लगातार नजर रखी जा रही है। 

विभाग को फोटो समेत अपडेट दिया जा रहा है। हरसेक की रिपोर्ट के अनुसार कुल 80 केसों में सबसे अधिक मामले कुरुक्षेत्र 25 और करनाल में 25 आए हैं। इसके अलावा अंबाला 10, जींद 8, कैथल 8, फतेहाबाद 3, पानीपत-सोनीपत 2-2, पलपल और यमुनानगर में 1-1 स्थान पर पराली जलाई गई है। 
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शेष 12 जिलों में एक स्थान पर भी पराली जलाना रिपोर्ट नहीं हुआ है। इस बार बेमौसमी बारिश के चलते धान की कटाई भी प्रभावित रही है। इस कारण सितंबर माह में प्रदेश में पराली जलाने का कोई केस सामने नहीं आया। अभी धान कटाई का सीजन जोरों पर है। अक्तूबर माह में ही पराली जलाने के 80 मामले सामने आए हैं। इनमें पांच अक्तूबर को 24 और छह को 26 स्थानों पर पराली जलाई गई।
 

हरियाणा सरकार द्वारा चलाए गए विशेष अभियान का असर है कि इस बार पराली जलाने के मामले कम सामने आ रहे हैं। खेत में पड़े पराली के बंडल इस बात के गवाह हैं कि किसानों ने पराली का प्रबंधन किया है। साथ ही पराली बेचकर अपनी आय बढ़ाई है। इससे पर्यावरण भी बचा है, दूसरा जमीन की उर्वरता भी बनी रही है। कृषि विभाग की तरफ से अपील है कि अपने आस पास के पड़ोसी किसानों को भी पराली नहीं जलाने के लिए जागरूक करें।  -हरदीप सिंह, महानिदेशक, कृषि विभाग

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