पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना में स्मार्ट साइकिल चलाने वाली कंपनी ने स्मार्ट सिटी को पत्र लिखकर कहा है कि कोरोना एक्ट ऑफ गॉड है, इसलिए कोरोना काल में जो समय बर्बाद हुआ, उसकी प्रतिपूर्ति के लिए तीन से चार माह की समय सीमा बढ़ाई जाए। कंपनी को अप्रैल 2022 तक शहर के 617 डॉकिंग स्टेशन से पांच हजार साइकिल संचालित करनी हैं।
कंपनी को पिछले साल ही शहर में साइकिल संचालित करनी थी लेकिन कोरोना महामारी के कारण समय से साइकिल नहीं चल सकीं। उसके बाद कंपनी को 27 जून 2021 से पहले फेज की साइकिल चलानी थी लेकिन कंपनी तब भी शुरू नहीं कर सकी। किसी तरह 12 अगस्त से शहर में 1250 साइकिल शुरू हो सकीं। कंपनी के अनुसार अगले साल अप्रैल तक साइकिल चलाना संभव नहीं है, इसलिए समय सीमा बढ़ाई जाए।
चेन्नई से साइकिल लाने में की थी निगम ने मदद
कंपनी को काम के लिए अतिरिक्त 90 दिन का समय दिया गया था। तय समय में काम न करने पर कंपनी के 47 दिन कम हो गए हैं। अब कंपनी को सिर्फ 43 दिन ही अतिरिक्त मिलेंगे। इससे अधिक दिन लेने पर कंपनी के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस में से दिन कम हो जाएंगे।
स्मार्ट सिटी के अधिकारियों का कहना है कि जब कोरोना काल में कंपनी का माल चेन्नई में फंसा था तो चेन्नई नगर निगम को पत्र लिखकर माल निकलवाया था। स्मार्ट सिटी अपनी ओर से पूरी मदद कर रही है फिर भी कंपनी तय समय सीमा में काम नहीं कर रही है।
फिलहाल मुझे पत्र नहीं मिला है लेकिन इस संबंध में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की बैठक में ही निर्णय होता है। इस तरह की शिकायत मिलेगी तो उस पर विचार करेंगे। -एनपी शर्मा, जीएम, स्मार्ट सिटी
कोरोना काल में काफी नुकसान हुआ है। माल की आवक पहले की तरह नहीं है। काम करने वाले लोग भी कम है। ऐसी स्थिति में थोड़ा समय बढ़ जाएगा तो बेहतर होगा। -अभिनंदन मल्होत्रा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, पब्लिक बाइक शेयरिंग।