महाराष्ट्र सरकार की धक्केशाही नहीं करेंगे सहन: ज्ञानी रघबीर सिंह
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार की ओर से तख्त श्री हजूर साहिब नांदेड़ प्रबंधन बोर्ड के अधिनियम में मनमाने ढंग से संशोधन किया गया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के नामित सदस्यों की संख्या कम कर दी गई है। महाराष्ट्र सरकार की इस धक्केशाही को सहन नहीं किया जाएगा।
ज्ञानी रघबीर सिंह ने कहा कि सिख पंथ किसी भी कीमत पर अपने पवित्र तीर्थ स्थलों की व्यवस्था में सरकारी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं कर सकता है। उन्होंने शिरोमणि कमेटी को आदेश दिया है कि वह तख्त श्री हजूर साहिब प्रशासनिक बोर्ड के एक्ट में मनमाने ढंग से बदलाव के मामले पर महाराष्ट्र सरकार से बातचीत कर सिख विरोधी फैसले को वापस लेने की व्यवस्था करे।
शिअद ने कहा- यह सिख धार्मिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप
शिरोमणि अकाली दल (शिअद) ने महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार के फैसले की निंदा की और आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र सरकार के फैसले से सिखों के हितों को नुकसान पहुंचा है। शिअद के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि यह कदम सिख धार्मिक मामलों में सीधा हस्तक्षेप है और इसे तत्काल रदद किया जाना चाहिए। डॉ. चीमा ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने बोर्ड के कुल 17 सदस्यों में से 12 को सीधे नामित करने का मार्ग प्रशस्त किया है। इस फैसले से एसजीपीसी द्वारा भेजे गए सदस्यों की संख्या चार से घटाकर दो कर दी गई है। यहां तक कि प्रमुख खालसा दीवान और हजूरी सचखंड दीवान का नामांकन भी समाप्त कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह दो सिख सांसद, जो बोर्ड के सदस्य हुआ करते थे, उन्हें भी नए संशोधन में इस अधिकार से वंचित कर दिया गया है। डॉ. चीमा ने कहा कि ऐसा लगता है कि एकनाथ शिंदे सरकार मनमाने ढ़ंग से गुरुद्वारा बोर्ड का नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहती है। इसे सिख संगत कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।
सुखदेव ढींडसा ने भी फैसले की निंदा की
शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) ने भी महाराष्ट्र सरकार के फैसले की कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी प्रधान सुखदेव सिंह ढींडसा ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि ऐसा करके महाराष्ट्र सरकार ने सीधे तौर पर सिखों के मामलों में दखलअंदाजी की है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को संशोधन करने से पहले सिख कौम की मिनी पार्लियामेंट एसजीपीसी और अन्य सिख विद्वानों के साथ विचार-विमर्श करना चाहिए था। ढींडसा ने महाराष्ट्र की शिंदे सरकार से संशोधन तुरंत वापस लेने की अपील और कहा कि इस संशोधन से गुरुद्वारा बोर्ड पर महाराष्ट्र सरकार का पूरा कब्जा हो जाएगा। इससे सिखों में भारी रोष है।
यह है मामला
महाराष्ट्र सरकार ने तख्त श्री हजूर साहिब प्रबंधक बोर्ड (नांदेड) अधिनियम में संशोधन किया है। इसमें मनोनीत सदस्यों की संख्या में इजाफा किया गया है। वहीं प्रबंधकीय बोर्ड में एसजीपीसी के चार सदस्यों से संख्या घटाकर दो कर दी गई है। संशोधित विधेयक के अनुसार मौजूदा बोर्ड में कुल सदस्यों की संख्या 17 होगी। इनमें 12 सदस्य सरकार मनोनीत करेगी। वहीं दो सदस्य एसजीपीसी से मनोनीत होंगे। शेष तीन सदस्यों का चयन चुनाव प्रक्रिया से होगा। पहले सरकार से मनोनीत होने वाले सदस्यों की संख्या सात थी।