दूसरी ओर, पार्टी पर्यवेक्षकों के साथ बातचीत के दौरान रंधावा की दावेदारी पर सवाल उठाते हुए सिद्धू ने अपनी दावेदारी पेश कर दी, जिसे हरीश रावत ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि आपके (सिद्धू के) पास प्रदेश प्रधान का पद है, इसलिए दूसरे पद के लिए दावा पेश नहीं किया जा सकता लेकिन यह खबर सिद्धू समर्थकों तक पहुंचते ही हलचल तेज हो गई।
सिद्धू समर्थकों ने जाट-सिख मुख्यमंत्री के तौर पर नवजोत सिद्धू को पद सौंपने की मांग की और नारेबाजी शुरू कर दी। सिद्धू के समर्थक इस बात पर अड़ गए कि मुख्यमंत्री पद सिद्धू को ही दिया जाए। आखिरकार सिद्धू और रंधावा की खींचतान का सीधा लाभ चरणजीत चन्नी को मिला। रंधावा ने दलित-सिख नेता के रूप में पर्यवेक्षकों को चन्नी का नाम सुझाया। इस पर सिद्धू को भी सहमति देनी पड़ी। हाईकमान ने भी तुरंत दलित नेता को तरजीह देते हुए चरनजीत चन्नी के नाम पर सबकी सहमति ली और उन्हें सीएम घोषित कर दिया।
डेरा बाबा नानक में खुशी के बाद मायूस हुए रंधावा समर्थक
सोशल मीडिया पर जब पंजाब के सीएम के तौर सुखजिंदर सिंह रंधावा का नाम सामने आया तो रंधावा के विधानसभा क्षेत्र डेरा बाबा नानक के लोगों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहा। कांग्रेस कार्यकर्ता यह खबर सुन ढोल की थाप पर झूमने लगे। इसके बाद डेरा बाबा नानक के चौक पर लड्डू बांटे गए। खुशी में जमकर आतिशबाजी भी हुई।
डेरा बाबा नानक के लोगों ने जमकर जश्न मनाया लेकिन रविवार को देर शाम को जब पता चला कि सुखजिंदर सिंह रंधावा की जगह अब चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की गई है तो स्थानीय लोगों और रंधावा समर्थकों में मायूसी छा गई।