वातानुकूलित और हवादार माहौल पर स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी की सख्ती से पालना करने के भी आदेश दिए गए हैं। दिशा-निर्देशों के मुताबिक, कार्यालयों में सार्वजनिक कामकाज को जरूरत आधारित और आपात मसलों को निपटाने तक सीमित किया जा सकता है। मंत्रिमंडल की तरफ से हाल ही मंजूर ऑनलाइन सार्वजनिक शिकायत निपटारा प्रणाली को और ज्यादा प्रयोग में लाया जाएगा।
कोविड के लिए संशोधित प्रबंधन और सीमित रणनीति के मुताबिक एसोसिएशनों के मांग पत्रों की व्यावहारिक पेशकारी नहीं होगी। चाय परोसने आदि से गुरेज किया जाएगा और काम वाली जगह पर पांच से अधिक व्यक्तियों का मीटिंग करना भी वर्जित होगा। स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे की पूरी क्षमता के अनुसार प्रयोग करने के लिए बिना लक्षण वाले /कम प्रभावित मरीजों, जिन्हें अन्य गंभीर बीमारियां /समस्याएं न हों, को जरूरत के अनुसार कोविड इलाज केन्द्रों /घरेलू एकांतवास में रखा जाएगा।
दूसरे और तीसरे दर्जे की सुविधाओं वाले बेड ऐसे मरीजों के इलाज के लिए नहीं इस्तेमाल होंगे। उन्हें निचले स्तर की इलाज सुविधा के लिए रेफर किया जाएगा। राज्य सरकार की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि निजी इलाज केन्द्रों के साथ समझौते का यह मतलब नहीं कि सरकार द्वारा अंतिम चरण पर रेफर किए मरीजों के लिए पहले से ही बेड रोक लिए जाएं। ऐसे मामलों में सरकार की तरफ से सिर्फ रेफर किये गए मरीजों के लिए ही अदा करने योग्य चार्ज दिए जाएंगे।
डिप्टी कमीशनरों /पुलिस कमीशनरों /जिला पुलिस मुखियों की तरफ से यह यकीनी बनाया जाएगा कि सभी अस्पताल, जो कोविड से प्रभावित मरीज़ों का इलाज कर सकते हों, बेडों की उपलब्धता संबंधी जानकारी मुहैया करवाने और किसी भी कोविड पॉजिटिव मरीज को इलाज से मना नहीं करेंगे।
मानसून सीजन के दौरान पानी से होने वाली बीमारियों के खतरे को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने साफ -सफाई की मुहिम का फैसला किया है, जिसे शहरी स्थानीय निकाय संस्थाओं और पंचायती राज्य संस्थाओं द्वारा चलाया जाएगा ताकि डेंगू/वैकटर बार्न बीमारियों को रोका जा सके।