नवंबर 21, 2002 की सरकारी नीति और दिसंबर 28, 2005 को एक पत्र के जरिए किए गए संशोधन के मुताबिक, मृतक कर्मचारी /अधिकारी के वारिसों के लिए मौत की तारीख से एक साल के अंदर नौकरी के लिए आवेदन देना जरूरी होता है।
तीन साल पहले जुड़ा है रिश्ता: कांगड़
कैबिनेट मंत्री गुरप्रीत कांगड़ ने अपने रसूख से दामाद गुरशेर को नौकरी दिलाने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि भुपजीत सिंह के परिवार के उनका रिश्ता तीन साल पहले ही जुड़ा है और गुरशेर को नौकरी का मामला 10 साल पुराना है। कांगड़ ने कहा कि गुरशेर सिंह को अनुकंपा के आधार पर दी गई नौकरी नियमानुसार है और इसके लिए उन्होंने कोई प्रयास नहीं किया।
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नौकरी को लेकर पूरे प्रदेश में बेरोजगार युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। मंत्री के दामाद को अनुकंपा के आधार पर नौकरी कैप्टन साहब ने दे दी लेकिन जो रोजगार के लिए सड़कों पर हैं उन पर तरस नहीं खा रहे हैं। पंजाब के लोगों के साथ यह सरासर नाइंसाफी है। हरपाल सिंह चीमा, नेता प्रतिपक्ष, पंजाब।
यह फैसला न्यायोचित नहीं है। इससे पहले भी पंजाब में हजारों लोग आतंकवाद के दौर में अपनी जान गंवा चुके हैं लेकिन सरकार ने उन्हे कोई नौकरी नहीं दी। फिर मंत्रियों और विधायकों के परिजनों को कैप्टन कैसे नौकरी दे सकते हैं। सुभाष शर्मा, महामंत्री, भाजपा, पंजाब।